लखनऊ की सड़कों पर गंदगी देख भड़के प्रभारी मंत्री: मेयर के साथ 4 वार्डों में की छापेमारी; LSA हेड को लगी कड़ी फटकार

मेयर को इंदिरानगर में कई जगह सड़क किनारे कूड़े के ढेर मिले।

लखनऊ (राजधानी न्यूज): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सफाई व्यवस्था की पोल एक बार फिर खुल गई है। शनिवार को शहर के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना और मेयर सुषमा खर्कवाल ने जब अचानक चार वार्डों का औचक निरीक्षण किया, तो जमीनी हकीकत देखकर वे दंग रह गए। सड़कों पर बिखरा कूड़ा, चोक नालियां और ट्रांसफॉर्मर के नीचे जमा गंदगी देख मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान मेयर सुषमा खर्कवाल ने कार्यदायी संस्था लखनऊ स्वच्छता अभियान (LSA) के हेड अभय रंजन को मौके पर ही बुलाकर जमकर फटकार लगाई और जवाब-तलब किया।

इन 4 वार्डों में मिली भारी अव्यवस्था; जनता ने खोली पोल

प्रभारी मंत्री, मेयर और नगर आयुक्त गौरव कुमार ने जोन-7 के अंतर्गत आने वाले इलाकों का दौरा किया:

मैथिली शरण गुप्त वार्ड: यहाँ मुख्य मार्गों पर गंदगी के ढेर मिले।

इस्माइलगंज प्रथम: नालियां चोक होने के कारण जलभराव की स्थिति दिखी।

इंदिरानगर: यहाँ से सफाई न होने की सबसे ज्यादा शिकायतें मिल रही थीं। मौके पर एक भी सफाईकर्मी नजर नहीं आया।

बाबू जगजीवन राम वार्ड: सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद बदहाल पाई गई।

जब मंत्री और मेयर इंदिरानगर पहुंचे, तो स्थानीय निवासियों ने शिकायतों की झड़ी लगा दी। लोगों का आरोप था कि उनके इलाके में कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नियमित रूप से नहीं आती हैं। इस पर मेयर ने जोनल अधिकारी रामेश्वर प्रसाद को आदेश दिया कि वे घर-घर जाकर फीडबैक लें और शाम तक रिपोर्ट सौंपें।

मंत्री की चेतावनी: “गंदगी से खराब हो रही शहर की छवि”

प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने निरीक्षण के बाद अधिकारियों के साथ बैठक में कड़ा रुख अख्तियार किया:

बीमारियों का खतरा: मंत्री ने कहा कि नालियों की सफाई न होने से मच्छर पनपते हैं, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

छवि पर असर: उन्होंने स्पष्ट किया कि गंदी सड़कें न केवल लखनऊ की छवि खराब करती हैं, बल्कि यातायात को भी बाधित करती हैं।

शौचालयों की स्थिति: सार्वजनिक शौचालयों में सफाई रजिस्टर मेंटेन करने और नियमित सफाई के निर्देश दिए गए।

अतिक्रमण: मंत्री ने स्वीकार किया कि शहर में ‘स्थायी अतिक्रमण’ अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसे हटाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।

नगर आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं कि जिन भी कर्मचारियों या अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, उन्हें चिह्नित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।

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