लखनऊ (राजधानी न्यूज): उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. साल 2022 से राज्य में चले आ रहे ‘कार्यवाहक डीजीपी’ के लंबे सिलसिले को खत्म करते हुए शासन ने 1991 बैच के सीनियर आईपीएस (IPS) अधिकारी राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश का नया स्थायी और पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त कर दिया है.
शनिवार को नाम तय होने के बाद रविवार को उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय प्रसाद की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया. नियुक्ति का आदेश जारी होने के बाद रविवार शाम करीब साढ़े 6 बजे नवनियुक्त डीजीपी राजीव कृष्ण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने उनके सरकारी आवास पहुंचे. इस शिष्टाचार भेंट के दौरान दोनों के बीच प्रदेश की सुरक्षा और विभिन्न प्रशासनिक मसलों पर गहन चर्चा हुई.
UPSC की गाइडलाइन से कम से कम 2 साल का मिला कार्यकाल
यूपीएससी (UPSC) की गाइडलाइन और सुप्रीम कोर्ट के तय नियमों के मुताबिक, स्थायी डीजीपी बनने के बाद राजीव कृष्ण का इस पद पर कार्यकाल कम से कम 2 साल का होगा. वैसे उनका मूल सेवाकाल जून 2029 तक निर्धारित है. यदि वे अगले 2 साल तक स्थायी डीजीपी के पद पर बने रहते हैं, तो अपने 1 साल के कार्यवाहक कार्यकाल (1 जून 2025 से अब तक) को जोड़कर वे कुल 3 साल तक यूपी पुलिस के इस सबसे बड़े पद पर रहने वाले हाल के दिनों के इकलौते अधिकारी बन जाएंगे.
दिल्ली की बैठक में फाइनल हुआ था 3 अफसरों का पैनल
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरुआत में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को 19 आईपीएस अधिकारियों के नामों की सूची भेजी थी. इसे लेकर 26 मई को दिल्ली में आयोग की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें यूपी के मुख्य सचिव एसपी गोयल और अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद भी शामिल हुए थे. सीनियारिटी के आधार पर आयोग ने गहन मंथन के बाद तीन अधिकारियों का पैनल फाइनल कर यूपी सरकार को भेजा था:
- रेणुका मिश्रा (1990 बैच): पैनल में इनका नाम सबसे ऊपर था, जो बीते 2 साल से बिना किसी चार्ज के डीजीपी कार्यालय में अटैच हैं.
- पीयूष आनंद (1991 बैच): वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और एनडीआरएफ (NDRF) के डीजी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं.
- राजीव कृष्ण (1991 बैच): जो कार्यवाहक कमान संभाल रहे थे और मुख्यमंत्री की अंतिम मंजूरी के बाद अब स्थायी मुखिया बन चुके हैं.
प्रयागराज से शुरू हुआ सफर, लखनऊ में दो बार रहे कप्तान
26 जून 1969 को जन्मे और मूलरूप से नोएडा के रहने वाले राजीव कृष्ण का प्रशासनिक और पुलिसिंग करियर बेहद शानदार रहा है.
- शुरुआती तैनातियां: 1991 में आईपीएस बनने के बाद उनकी पहली तैनाती प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुई थी. इसके बाद उन्होंने बरेली, कानपुर और अलीगढ़ में एएसपी के तौर पर काम किया.
- जिले की कमान: 10 मार्च 1997 को उन्हें पहली बार जिले की कमान सौंपते हुए फिरोजाबाद का एसपी बनाया गया था. इसके बाद वे इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, आगरा, लखनऊ और बरेली के एसएसपी रहे.
- डीआईजी व एडीजी व्यवस्था: मायावती के शासनकाल में जब बड़े जिलों में डीआईजी की तैनाती शुरू हुई, तब वे लखनऊ के डीआईजी बने. वे मेरठ रेंज के आईजी भी रहे और 2012 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए. सितंबर 2017 में वापसी के बाद वे मुरादाबाद पुलिस अकादमी में रहे, फिर फरवरी 2018 में लखनऊ जोन के एडीजी बने. इसके बाद वे करीब ढाई साल तक आगरा जोन के एडीजी भी रहे.
प्रभावशाली और प्रशासनिक बैकग्राउंड वाला है परिवार
डीजीपी राजीव कृष्ण एक ऐसे रसूखदार घराने से संबंध रखते हैं, जहां परिवार में दो पीढ़ियों से सिविल सेवाओं और राजनीति में मजबूत उपस्थिति है और कुल मिलाकर 6 से ज्यादा अधिकारी हैं.
- उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह एक वरिष्ठ आईआरएस (IRS) अफसर हैं और मौजूदा समय में नोएडा में सीबीडीटी (CBDT) में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात हैं.
- लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से मौजूदा विधायक राजेश्वर सिंह इनके साले हैं. राजेश्वर सिंह यूपी पुलिस के 1996 बैच के पीपीएस अफसर रहे हैं, जो बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) में मर्ज हो गए थे और 2022 के चुनाव से ठीक पहले वीआरएस (VRS) लेकर राजनीति में आए.
- राजेश्वर सिंह की पत्नी यानी डीजीपी राजीव कृष्ण की सलहज लक्ष्मी सिंह वर्तमान में गौतमबुद्धनगर (नोएडा) की पुलिस कमिश्नर हैं. इसके अलावा इनके ससुर भी पुलिस विभाग में डीआईजी (DIG) रह चुके हैं.
मुकुल गोयल के हटने के बाद 4 साल से चल रहा था ‘सस्पेंस’
उत्तर प्रदेश में पिछले 4 साल से स्थायी डीजीपी की कुर्सी खाली चल रही थी. 11 मई 2022 को तत्कालीन पूर्णकालिक डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद से प्रदेश को सिर्फ कार्यवाहक डीजीपी ही मिलते रहे. मुकुल गोयल के बाद डीएस चौहान, फिर दो महीने के लिए आरके विश्वकर्मा, उनके बाद विजय कुमार और फिर प्रशांत कुमार को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था. प्रशांत कुमार के पिछले साल 31 मई को रिटायर होने के बाद, 1 जून 2025 से राजीव कृष्ण कार्यवाहक तौर पर यूपी पुलिस की कमान संभाल रहे थे, जिन्हें अब पूर्णकालिक जिम्मेदारी मिल गई है.




