लखनऊ (राजधानी न्यूज): नवाबों के शहर लखनऊ में साइबर अपराधियों ने ठगी की एक ऐसी सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है, जिसने पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। हजरतगंज जैसे पॉश इलाके में रहने वाली यूपी सरकार की पीएमएस (PMS) सेवा से रिटायर्ड 75 वर्षीय महिला डॉक्टर जिया सुल्ताना से जालसाजों ने 1 करोड़ 55 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने खुद को पुलिस, NIA और ATS का बड़ा अधिकारी बताकर महिला को उनके घर में ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी स्थिति में रखा।
आधार के दुरुपयोग और ‘आतंकवाद’ का दिखाया डर
शाहनज इमामबाड़ा कैंपस, राणा प्रताप मार्ग की निवासी डॉ. जिया सुल्ताना के अनुसार, यह खौफनाक खेल 11 अप्रैल की रात 9 बजे शुरू हुआ:
फर्जी इंस्पेक्टर की कॉल: सबसे पहले एक कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को लखनऊ हेडक्वार्टर का इंस्पेक्टर आकाश शर्मा बताया। उसने दावा किया कि डॉक्टर साहिबा का आधार नंबर किसी गैरकानूनी और आतंकवादी गतिविधि में इस्तेमाल हुआ है।
गोपनीयता का दबाव: ठगों ने उन्हें सख्त हिदायत दी कि वे इस ‘जांच’ के बारे में किसी को न बताएं, वरना उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
NIC सर्टिफिकेट के नाम पर की ‘करोड़ों की वसूली’
महिला को पूरी तरह डराने के बाद ठगों ने दूसरे नंबर से कॉल की:
फर्जी NIA चीफ: प्रेम कुमार नामक व्यक्ति ने खुद को एनआईए (NIA) चीफ बताकर बैंक खातों की पूरी जानकारी ले ली।
सुरक्षा प्रमाणपत्र का झांसा: ठगों ने कहा कि क्लीन चिट पाने के लिए पुणे स्थित एटीएस (ATS) विभाग से NIC सर्टिफिकेट लेना होगा।
ट्रांसफर की चेन: डर के मारे महिला ने बिना किसी को बताए चार बार में कुल 1.55 करोड़ रुपए ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। जालसाजों ने वादा किया था कि ‘जांच’ पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।
संपर्क बंद होने पर खुला राज
जब डॉ. जिया सुल्ताना ने अपनी रकम वापस मांगी, तो ठगों ने मोबाइल बंद कर दिया और उनसे संपर्क तोड़ लिया। ठगी का एहसास होने पर पीड़िता ने हजरतगंज कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस अब ‘ट्रांजैक्शन चेन’ के जरिए उन बैंक खातों को ट्रैक कर रही है जिनमें मोटी रकम भेजी गई है।



