आकाशवाणी लखनऊ का 89वां स्थापना दिवस: CM Yogi होंगे मुख्य अतिथि, इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सजेगी सुरों की महफिल

आकाशवाणी लखनऊ

लखनऊ (राजधानी न्यूज): भारतीय प्रसारण सेवा के गौरवशाली स्तंभ आकाशवाणी लखनऊ आज, 2 अप्रैल 2026 को अपना 89वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर लखनऊ के गोमती नगर स्थित इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स सभागार में शाम 5:00 बजे एक भव्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम विवरण

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ होंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक उपस्थित रहेंगे। प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) गौरव द्विवेदी और महानिदेशक राजीव कुमार जैन भी इस उत्सव का हिस्सा बनेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहेंगे मुख्य अतिथि

ऐतिहासिक विरासत: ‘सुरों का समुद्र’ और महान विभूतियों का साथ

आकाशवाणी लखनऊ की स्थापना 2 अप्रैल 1938 को हुई थी। आजादी और विभाजन के समय भारत में गिने-चुने 6 रेडियो केंद्र थे, जिनमें से लखनऊ एक प्रमुख केंद्र था।

महान हस्तियां: इस केंद्र की माइक्रोफोन से उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की शहनाई, निराला जी की कविताएं, अमृतलाल नागर का साहित्य, बेगम अख्तर की गजलें और नौशाद अली का संगीत गूंजता रहा है।

मालिनी अवस्थी का संदेश: सुप्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने आकाशवाणी लखनऊ को “सुरों का समुद्र” बताते हुए कहा कि इस संस्थान से जुड़ना किसी भी कलाकार के लिए गर्व की बात है।

मालिनी अवस्थी- लोकगायिका

तकनीकी विकास और खेती-किसानी का साथी

पूर्व अधिकारी विजय कुमार बनर्जी और वरिष्ठ प्रसारक दिगंबर सिंह चौहान के अनुसार, पिछले आठ दशकों में आकाशवाणी ने तकनीकी स्तर पर अभूतपूर्व बदलाव देखे हैं।

इंजीनियरिंग में बदलाव: शुरुआती भारी-भरकम मशीनों से लेकर आज डिजिटल रिकॉर्डिंग तक का सफर शानदार रहा है।

गुणवत्ता और विज्ञान: आज भी कार्यक्रमों की वैज्ञानिक सटीकता और उच्च गुणवत्ता के कारण इसकी महत्ता बरकरार है।

किसानों की आवाज: आकाशवाणी लखनऊ खेती-किसानी से जुड़ी जटिल वैज्ञानिक जानकारियों को सरल भाषा में सीधे किसानों तक पहुँचाने का सेतु बना हुआ है।

आज की शाम: ध्रुपद, गजल और लोक संगीत की त्रिवेणी

स्थापना दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक छटा बिखरेगी:

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: लखनऊ, वाराणसी और मथुरा केंद्रों के कलाकार ध्रुपद, गजल, भोजपुरी और ब्रज के गीतों की शानदार प्रस्तुति देंगे।


डॉ हरिओम की होगी गज़ल संध्या

भातखंडे विश्वविद्यालय: भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के छात्र राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत प्रस्तुत करेंगे।

सम्मान समारोह: इस दौरान उन वरिष्ठ प्रसारकों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने दशकों तक अपनी आवाज से समाज को नई दिशा दी।

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