लखनऊ (ब्यूरो): उन्नाव हाईवे पर बंद पड़े एक पेट्रोल पंप के पास देर रात कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कोतवाली प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत मिश्रा की सरकारी गाड़ी की मौजूदगी में, आरक्षी सौरभ मिश्रा और एक लड़के की मदद से मवेशियों के वाहन चालकों से कथित रूप से पैसे वसूले जा रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जो अब चर्चा का विषय बना है।
नाबालिग से अवैध वसूली करा रहे हैं कोतवाल चंद्रक्रांत मिश्रा?
जानकारी के अनुसार रात के समय एक लड़का (जिसकी उम्र 17 से 19 वर्ष लगभग बताई जा रही है) टॉर्च की रोशनी के सहारे मवेशियों की आने-जाने वाली गाड़ियों को रुकने का संकेत देता है। जैसे ही वाहन रुकता है, चालक उससे संपर्क करता है और फिर पैसे देकर आगे बढ़ता है। आरोप है कि इसके बाद वाहन सीधे उस स्थान पर पहुंचता है जहां कोतवाल की सरकारी गाड़ी खड़ी होती है और उनके द्वारा खड़ा किया गया लड़का कथित रूप से गाड़ी में बैठे आरक्षियों को पैसे देने के बाद पुनः अगली वसूली के लिए अपने स्थान पर खड़ा हो जाता है, उसके बाद वाहन को जाने दिया जाता है। नाम न बताने कि शर्त पर स्थानीय लोगों ने बताया- यह कोई एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा एक संगठित अवैध वसूली तंत्र है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करते हैं जीरो टॉलरेंस और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में योगी आदित्यनाथ की सरकार जीरो टॉलरेंस और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात करती है। ऐसे में यह घटनाक्रम इन दावों पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है।
भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के प्रति भी हमारा ‘जीरो टॉलरेंस’ उसी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है… pic.twitter.com/3ZvNdTt6Yy
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) April 6, 2026
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह पूरी गतिविधि कोतवाली प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत मिश्रा की जानकारी और संरक्षण में चल रही थी? क्योंकि मौके पर कथित रूप से सरकारी गाड़ी की मौजूदगी और पुलिसकर्मियों की भूमिका कई गंभीर संकेत देती है। ऐसे में लगभग रात 1 बजे से हाईवे किनारे पेट्रोल पंप पर सदर कोतवाली की गाड़ी खड़ी हो जाती है और रात की शिफ्ट के आरक्षी एक लड़के को खड़े करके काम को आगे बढ़ाते हैं। कथित आरोप यह भी है कि आरक्षी सौरभ मिश्रा और कई अन्य आरक्षी काफी समय से इसी प्रकार से हाईवे पर अवैध वसूली के काम में सक्रिय हैं, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। पूर्व में भी ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों के नाम सामने आते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई अक्सर कागजी स्तर तक ही सीमित रह जाती है।
ट्विट पर उन्नाव पुलिस का जवाब: जब भी इस ख़बर से संबंधित ट्विट किया जाता है तो हर बार उन्नाव पुलिस जांच शुरु करने की बात कहती है। क्या अभी तक कोई जांच नतीजे तक नहीं पहुंची?
देखिए उन्नाव पुलिस ने कब- कब इस संबंध में जांच शुरु करने की बात ट्विट में कही:
संदर्भित प्रकरण के संदर्भ मे सहायक पुलिस अधीक्षक / क्षेत्राधिकारी नगर को पूर्ण प्रकरण की जांच हेतु निर्देशित किया गया। जांच मे जो भी तथ्य प्रकाश में आयेंगे,तद्अनुसार अग्रिम विधिक कार्यवाही की जायेगी।
— UNNAO POLICE (@unnaopolice) April 19, 2026
उन्नाव पुलिस द्वारा निरंतर जुंए एवं सट्टे के विरुद्ध कार्यवाही की जा रही है। जो भी व्यक्ति आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाया जायेगा, जांच कर विधिक कार्यवाही की जायेगी।
— UNNAO POLICE (@unnaopolice) April 26, 2026
संदर्भित प्रकरण के संदर्भ मे सहायक पुलिस अधीक्षक / क्षेत्राधिकारी नगर को पूर्ण प्रकरण की जांच हेतु निर्देशित किया गया। जांच मे जो भी तथ्य प्रकाश में आयेंगे,तद्अनुसार अग्रिम विधिक कार्यवाही की जायेगी।
— UNNAO POLICE (@unnaopolice) April 19, 2026
सवाल ये है कि 19 अप्रैल से इसकी जांच नहीं हो पाई? आज फिर वही रिप्लाई?
प्रकरण के सन्दर्भ में सहायक पुलिस अधीक्षक/ क्षेत्राधिकारी नगर को जांच कर आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया।
— UNNAO POLICE (@unnaopolice) May 1, 2026
सवाल ये भी है कि पुराने ट्विट जिनमें कार्यवाई शुरु करने की बात कही गई, उसमें क्या हुआ?
हालांकि, जहां एक ओर उच्च अधिकारियों तक बात आसानी से पहुंच गई, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय स्तर पर स्थिति अलग नजर आई। आरोप है कि सीओ और संबंधित थाने के प्रभारी को उनके सीयूजी नंबर पर कॉल करने के बावजूद उन्होंने फोन नहीं उठाया। बाद में जब मामला ऊपर तक पहुंचा और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई, तब कोतवाली प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत मिश्रा द्वारा फोन कर संपर्क किया गया, जिसमें उन्होंने कथित रूप से आक्रामक और तीखे लहजे में बातचीत की। मानो जैसे कोई बड़ा राज खुल गया हो।

सूत्रों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, तो जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक की रात की ड्यूटी रजिस्टर की जांच से पूरा सच सामने आ सकता है। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि उस क्षेत्र में किन-किन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी और घटनाओं के समय कौन मौजूद था। फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन द्वारा इस मामले में ठोस कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला केवल आश्वासनों तक ही सीमित रह जाता है। या फिर प्रेस अधिनियम नियमो पर दबाव डाला जाएगा।
दोषियों पर कार्रवाई या मामले को दबाने की कवायद: क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा केवल कागजों तक सीमित?”
इस कथित ‘वसूली कांड’ के सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिस्टम अपने ही लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कवायद शुरू हो जाएगी?
जनता के बीच चर्चा है कि क्या कोतवाल की सीधी मिलीभगत और संरक्षण के बिना हाईवे पर सरकारी गाड़ी लगाकर वसूली का इतना बड़ा तंत्र फल-फूल सकता था? अब पुलिस महकमे के भीतर चल रही जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं- क्या यह जांच निष्पक्ष होगी या किसी ‘क्लीन चिट’ की पटकथा लिखी जा रही है?
इतिहास गवाह है कि जब भी पुलिस की वर्दी पर भ्रष्टाचार के दाग लगते हैं, तो शुरुआती दबाव में जांच के आदेश तो हो जाते हैं, लेकिन धीरे-धीरे मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। प्रदेश सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा क्या इस मामले में दिखेगा, या फिर ‘सिस्टम’ अपने ही ‘सिस्टम’ को बचाने के लिए प्रेस अधिनियम और अन्य दबावों का इस्तेमाल करेगा?
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशासन की प्राथमिकता अपराधियों पर कार्रवाई करना है या फिर पुलिस की छवि बचाते हुए इस अवैध वसूली के काले खेल पर हमेशा के लिए पर्दा डालना?
SP और IG Range ने दिया जांच का आश्वासन
मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से संपर्क करने पर जांच का आश्वासन मिला है। लखनऊ रेंज के आईजी कार्यालय से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं जनपद स्तर पर भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई है।



