तमिलनाडु में ‘थलापति’ का राज: अभिनेता विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर रचा इतिहास; 63 साल बाद सत्ता की कुर्सी पर बैठा कोई ‘गैर-द्रविड़’ नेता

अभिनेता विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर रचा इतिहास

चेन्नई/लखनऊ (राजधानी न्यूज डेस्क): भारतीय राजनीति के इतिहास में रविवार का दिन एक युगांतरकारी घटना का गवाह बना। दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार और ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के संस्थापक सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। चेन्नई स्थित राजभवन में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

विजय की यह जीत न केवल एक अभिनेता का सत्ता के शिखर तक पहुंचना है, बल्कि यह तमिलनाडु की उस 59 साल पुरानी ‘द्रविड़ राजनीति’ के वर्चस्व का अंत भी है, जो 1967 से राज्य पर राज कर रही थी।

शपथ ग्रहण के दौरान हाई-वोल्टेज ड्रामा: जब राज्यपाल ने टोका

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब विजय जोश में आकर निर्धारित शपथ पत्र (Proforma) की लाइनों से इतर अपनी राजनीतिक विचारधारा और भविष्य की योजनाओं पर स्पीच देने लगे। विजय को अतिरिक्त बातें बोलते देख राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर ने उन्हें तुरंत बीच में ही टोक दिया। राज्यपाल ने सख्त लहजे में कहा, “मिस्टर विजय, कृपया वही पढ़ें जो कागज पर लिखकर दिया गया है।” इसके बाद विजय ने दोबारा शांत होकर औपचारिक पंक्तियों को तमिल भाषा में पढ़ा।

राहुल गांधी की मौजूदगी और ‘किंगमेकर’ की भूमिका

इस समारोह में सबसे खास उपस्थिति कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रही। राहुल गांधी का मंच पर मौजूद होना इस बात का प्रमाण है कि विजय की सरकार को कांग्रेस का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु में द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के द्वंद्व को खत्म करने के लिए कांग्रेस ने विजय के साथ हाथ मिलाया है।

चुनावी आंकड़े: TVK की ऐतिहासिक ‘डेब्यू’

महज दो साल पहले गठित हुई पार्टी TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में वह कारनामा कर दिखाया, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।

  • कुल सीटें: 234
  • TVK की जीत: 108 सीटें
  • गठबंधन का समर्थन: कांग्रेस, CPI, CPM, VCK और IUML के सहयोग से विजय के पास कुल 121 विधायकों का समर्थन है।
  • बहुमत का आंकड़ा: 118 (विजय बहुमत से 3 सीट आगे हैं)।

द्रविड़ राजनीति के 59 साल के किले का ध्वस्त होना

तमिलनाडु में 1967 के बाद से सत्ता की चाबी केवल DMK या AIADMK के पास रही है। आखिरी गैर-द्रविड़ मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलम (कांग्रेस) थे, जो 1963 से 1967 तक पद पर रहे। विजय की जीत ने साबित कर दिया कि तमिलनाडु की जनता अब भाषा और क्षेत्रवाद की पारंपरिक राजनीति से हटकर ‘बदलाव’ और ‘विकास’ की नई उम्मीदों के साथ खड़ी है।

विजय का ‘प्रथम कैबिनेट’: 9 मंत्रियों ने भी ली शपथ

मुख्यमंत्री विजय ने अपने पहले मंत्रिमंडल में पूरी तरह से अपनी ही पार्टी TVK के चेहरों पर भरोसा जताया है। फिलहाल किसी भी सहयोगी दल (जैसे कांग्रेस या लेफ्ट) के विधायक को मंत्री पद नहीं दिया गया है। शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची:

  1. एन. आनंद
  2. आधव अर्जुन
  3. डॉ. के.जी. अरुणराज
  4. के.ए. सेंगोट्टैयन
  5. पी. वेंकटरमणन
  6. आर. निर्मलकुमार
  7. राजमोहन
  8. डॉ. टी.के. प्रभु
  9. सेल्वी एस. कीर्तना

विजय का राजनीतिक सफर: ‘रील’ से ‘रियल’ नायक तक

विजय, जिन्हें उनके प्रशंसक प्यार से ‘थलापति’ (सेनापति) कहते हैं, उन्होंने फिल्मों के माध्यम से हमेशा सामाजिक मुद्दों को उठाया है। उनकी फिल्म ‘मर्सल’ और ‘सरकार’ ने राजनीतिक गलियारों में पहले ही हलचल मचा दी थी। जब उन्होंने राजनीति में उतरने का फैसला किया, तो कई लोगों ने इसे ‘एक्टर का शौक’ कहा, लेकिन 108 सीटें जीतकर उन्होंने उन सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया।

विपक्ष का आरोप है कि विजय के पीछे केंद्रीय शक्तियों का हाथ है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उनके कट्टर प्रशंसक वर्ग (Fanbase) ने उन्हें घर-घर का नेता बना दिया है।

चुनौतियां और भविष्य की राह

विजय के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती एक स्थिर सरकार चलाने की है। गठबंधन में शामिल कांग्रेस और वामपंथी दलों की अपनी विचारधाराएं हैं। ऐसे में बहुमत के करीब खड़ी सरकार को बिना किसी आंतरिक कलह के चलाना विजय के लिए असली परीक्षा होगी। साथ ही, तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था, नीट (NEET) का विरोध और भाषाई गौरव जैसे मुद्दों पर विजय का रुख क्या होगा, इस पर पूरे देश की नजर है।

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