लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का रूह कंपाने वाला प्रदर्शन: भीषण गर्मी में सड़क पर कीड़ों की तरह रेंगते हुए पहुंचे शिक्षा मंत्री के आवास, कई बदहवास

69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का रूह कंपाने वाला प्रदर्शन

लखनऊ (राजधानी न्यूज): राजधानी लखनऊ की तपती सड़क पर सोमवार को 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर एक ऐसा अनोखा और दर्दनाक प्रदर्शन किया, जिसने हर देखने वाले को झकझोर कर रख दिया। रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और जलती डामर की सड़क पर सैकड़ों अभ्यर्थी लेटकर और कीड़ों की तरह रेंगते हुए मंत्री के आवास तक पहुंचे। इस दौरान चिलचिलाती धूप के कारण कई अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ गई और वे बदहवास होकर सड़क पर ही गिर पड़े।

“सरकार की नजर में हम केवल कीड़े-मकौड़े”

सड़क पर रेंगते हुए प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का दर्द और आक्रोश चरम पर था। देवरिया से आए धनंजय गुप्ता ने रुआंसे होकर कहा, “हम आज शिक्षा मंत्री को यह बताने आए हैं कि आपकी सरकार में पिछड़ों और दलितों की हालत कीड़े-मकौड़े की तरह हो गई है। हमारी कहीं कोई सुनवाई नहीं है, नौकरी न मिलने से हम ऐसी ही जिंदगी जीने को मजबूर हैं। कोई खुशी से इस तपती धूप में सड़क पर नहीं लेटा है।”

अभ्यर्थियों ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि इस अंतहीन सिस्टम की लड़ाई में किसी ने अपनी मां को खो दिया तो किसी ने अपने बाप को। आज वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा तक नहीं दे पा रहे हैं और हाईकोर्ट में केस जीतने के बाद भी बेरोजगार भटक रहे हैं।

सड़क पर रेंगते हुए प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ फूटा गुस्सा

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछड़ों के नेता बनने वाले राजभर ने कभी उनके साथ न्याय की बात नहीं की।

अभ्यर्थियों ने कहा: “राजभर कहते हैं कि 69000 शिक्षक भर्ती वाले जूता खाने के लायक हैं। यह बेहद शर्मनाक बयान है। अगर हमें न्याय और नौकरी नहीं मिली, तो हम सब चंदा इकट्ठा करके ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ जमीन पर उतरकर प्रचार करेंगे और उन्हें चुनाव हरवाएंगे।”

कल (19 मई) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, सरकारी वकील भेजने की गुहार

जौनपुर से आए अभ्यर्थी नवलेश ने रोते-गिड़गिड़ाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल से न्याय की भीख मांगी। उन्होंने बताया कि लखनऊ के चक्कर काटने के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जिसके कारण उन्हें दिल्ली की खाक छाननी पड़ रही है।

अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता कोर्ट में सरकार की पैरवी को लेकर है। उन्होंने हाथ जोड़कर सरकार से गुहार लगाई:

  • वकील भेजने की मांग: अभ्यर्थियों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में अब तक 30 से ज्यादा तारीखें लग चुकी हैं, लेकिन लगभग हर बार सरकारी अधिवक्ता (सरकारी वकील) का कोर्ट न पहुंचना बेहद शर्मनाक है।
  • कल अहम तारीख: मंगलवार, 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की बेहद अहम सुनवाई होनी है। अभ्यर्थियों ने कहा कि फैसला जो भी हो वह कोर्ट तय करे, लेकिन सरकार कम से कम अपना नुमाइंदा (वकील) जरूर भेजे। यदि इस बार भी सुनवाई टली, तो कई अभ्यर्थी जान देने को मजबूर हो जाएंगे।

     

पुलिस ने संभाला, दी गई प्राथमिक राहत

भीषण गर्मी के बीच सड़क पर लेटने और रेंगने के कारण जब कई प्रदर्शनकारी बेहोशी की हालत में पहुंचने लगे, तो मौके पर तैनात लखनऊ पुलिस के जवानों ने तत्परता दिखाई। पुलिसकर्मियों ने बदहवास अभ्यर्थियों को संभाला, उन्हें सड़क से हटाकर छांव में बैठाया और पानी पिलाकर उनकी स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, राहत मिलने के बाद भी अभ्यर्थी मंत्री आवास के बाहर डटे रहे और देर तक नारेबाजी करते रहे।

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