लखनऊ में SP-SBSP के बीच ‘पोस्टर वॉर’ तेज: सपा दफ्तर के बाहर लगी बड़ी होर्डिंग, राजभर समाज की हत्याओं का ब्योरा देकर सुभासपा चीफ ओम प्रकाश राजभर पर साधा निशाना

लखनऊ (राजधानी न्यूज): उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच जारी ‘होर्डिंग वॉर’ एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। बुधवार को विक्रमादित्य मार्ग स्थित सपा प्रदेश मुख्यालय के ठीक बाहर एक विशाल होर्डिंग लगाई गई है, जिसने राज्य के सियासी पारे को गरमा दिया है। इस होर्डिंग के जरिए सूबे की कानून-व्यवस्था और एनडीए (NDA) की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया व योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर पर बेहद तीखा हमला बोला गया है।

2024 से 2026 तक की हत्याओं की लिस्ट जारी सपा युवजन सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज राजभर द्वारा लगवाई गई इस होर्डिंग में साल 2024 से लेकर अब तक (2026) राजभर समाज के लोगों पर हुए कथित अत्याचारों और हत्याओं की सूची जिलों के अनुसार सार्वजनिक की गई है। होर्डिंग पर सबसे ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा है: “भाजपा सरकार में 2024 से 2026 के बीच में हुई राजभर समाज के लोगों की हत्याएं।” पोस्टर में दिए गए जिलों के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • वाराणसी (6 हत्याएं): सुरेश राजभर (2025), फ़या राजभर (2025), छोटू राजभर (2025), डॉक्टर सचिन राजभर (2025), इंजीनियर रोहित राजभर (2026), और फते राजभर (2026)।
  • मऊ (5 हत्याएं): सुनील राजभर (2024), सुरेश राजभर (2025), अमित राजभर (2025), अनिल राजभर (2026), और सशिवबचन राजभर (2026)।
  • बलिया (3 हत्याएं): दिग्विजय राजभर (2025), चंदन राजभर (2026), और विक्की राजभर (2026)।
  • गाजीपुर (3 हत्याएं): शिव मूरत राजभर (2024), दीपक राजभर (2026), और सुधारन राजभर (2026)।
  • जौनपुर (2 हत्याएं): पंकज राजभर (2024) और सुनील राजभर (2026)।
  • अन्य जिले: बाराबंकी में रिंकी राजभर (2024) और संत कबीर नगर में नंदनी राजभर (2024) की हत्या का उल्लेख है।
सपा दफ्तर के बाहर लगी बड़ी होर्डिंग

‘ओम प्रकाश राजभर सिर्फ नाम की राजनीति करते हैं’— सपा नेता होर्डिंग लगवाने वाले सपा नेता पंकज राजभर ने प्रदेश की मौजूदा कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त यानी ‘जीरो’ करार दिया। उन्होंने कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि सुभासपा प्रमुख केवल अपने समाज के नाम पर सियासी रोटियां सेकते हैं और मंत्री पद मलाई काट रहे हैं, लेकिन जब समाज के लोगों की सुरक्षा और विकास की बात आती है, तो वे पूरी तरह मौन हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि राजभर और पूरा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज सिर्फ समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में ही पूरी तरह सुरक्षित और सम्मानित है।

क्यों शुरू हुआ यह ताजा विवाद? जानिए मंत्री जी का ‘ऑटो’ तंज दरअसल, इस पोस्टर वॉर की पटकथा गत रविवार को ही लिख दी गई थी, जब सुभासपा चीफ ओम प्रकाश राजभर ने लखनऊ की सड़कों पर अचानक ऑटो चलाकर अखिलेश यादव पर सीधा सियासी हमला बोला था।

मंत्री राजभर ने अपने पार्टी दफ्तर से लेकर सरकारी आवास तक खुद थ्रॉटल दबाकर ऑटो चलाया था और उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट की थीं। उन्होंने खुद को जमीन से जुड़ा और संघर्षों से उपजा नेता बताते हुए अखिलेश यादव पर तंज कसा था कि— “अखिलेश जी, आप चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, हम नहीं। आपकी पार्टी के आईटी सेल वाले और ट्रोलर सोशल मीडिया पर मेरी फोटो शेयर कर मेरी औकात बता रहे हैं, लेकिन मेरा संदेश साफ है कि अब ‘ऑटो वाले ओम प्रकाश राजभर’ आपके एसी और ट्विटर वाली राजनीति को बेनकाब करेंगे।”

मंत्री राजभर के इसी ‘ऑटो वाले तंज’ और ‘औकात’ वाले बयान के जवाब में बुधवार सुबह समाजवादी पार्टी ने यह बड़ा काउंटर अटैक करते हुए उनके ही राजभर वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए मर्डर केस की यह लिस्ट चौराहे पर टांग दी है।

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