नई दिल्ली/लखनऊ: भारतीय चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे फेज की फाइनल रिपोर्ट शुक्रवार को सार्वजनिक कर दी गई है। इस प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट किया गया है। वेरिफिकेशन के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें कुल 6.08 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
अकेले उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या में 13% की गिरावट दर्ज की गई है। 27 अक्टूबर को प्रक्रिया शुरू होने से पहले यूपी में वोटर्स की संख्या अधिक थी, जो अब घटकर 13.39 करोड़ रह गई है। यानी राज्य में कुल 2.04 करोड़ नाम हटाए गए हैं।
बंगाल में 91 लाख नाम बाहर; सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में भी बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है।
पश्चिम बंगाल: SIR के दौरान यहाँ करीब 90.83 लाख नाम हटाए गए। मतदाता सूची 7.66 करोड़ से घटकर अब 7.04 करोड़ के आसपास रह गई है।
विवाद: तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी थी, जिसके बाद शेड्यूल में कई बार बदलाव करने पड़े।
अन्य राज्य: राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल जैसे राज्यों में भी मतदाता सूची को शुद्ध (Purify) किया गया है।

अब तक 60 करोड़ कवर, 39 करोड़ वोटर्स का तीसरे फेज में होगा रिवीजन
चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को देशभर में SIR कराने का आदेश दिया था।
पहला फेज: बिहार से शुरुआत हुई, जहाँ फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं।
दूसरा फेज: यूपी और अन्य 8 राज्यों/3 UTs में प्रक्रिया पूरी हुई।
तीसरा फेज: देश के बाकी 39 करोड़ मतदाताओं (17 राज्य और 5 UTs) को तीसरे फेज में कवर किया जाएगा। यह प्रक्रिया इस महीने 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद शुरू होगी।

SIR क्या है और क्यों जरूरी था?
SIR एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) घर-घर जाकर वोटरों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पिछले 21 सालों (2004-2025) के बीच मतदाता सूची में आई गड़बड़ियों को ठीक करना है।
नाम कटने के प्रमुख कारण:
मतदाता की मृत्यु हो जाना।
एक ही व्यक्ति का दो अलग-अलग जगहों (राज्यों या विधानसभाओं) में नाम होना।
स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट (Migration) हो जाना।
अयोग्य या विदेशी नागरिकों के नाम सूची में शामिल होना।



