UP ATS और STF का बड़ा संयुक्त ऑपरेशन: पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के स्लीपर सेल से जुड़े 4 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार; संवेदनशील ठिकानों की कर रहे थे रेकी

लखनऊ (राजधानी न्यूज): उत्तर प्रदेश में आतंकी मंसूबों को नेस्तनाबूद करने की दिशा में यूपी एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को एक बड़ी और संयुक्त कामयाबी हाथ लगी है। दोनों जांच एजेंसियों ने एक हाई-प्रोफाइल इनपुट के आधार पर संयुक्त कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के स्लीपर सेल नेटवर्क से जुड़े चार संदिग्ध आतंकियों को दबोच लिया है। यह गिरोह देश के अत्यंत संवेदनशील सैन्य और नागरिक ठिकानों की रेकी कर उनकी गुप्त जानकारियां सीमा पार बैठे अपने आकाओं को भेज रहा था। इस देशविरोधी नेटवर्क के खुलासे के बाद लखनऊ स्थित एटीएस विशेष थाने में चारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

वेस्ट यूपी और उत्तराखंड के बॉर्डर से हुई धरपकड़

सुरक्षा एजेंसियों ने पुख्ता खुफिया सूचनाओं के आधार पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में एक साथ छापेमारी कर चारों संदिग्धों को दबोचा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  1. महकाब — निवासी सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)
  2. शाहरुख — निवासी सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)
  3. गगनदीप सिंह उर्फ गुरी सिंह — निवासी मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)
  4. मुशर्रफ — निवासी हरिद्वार (उत्तराखंड)

अस्पतालों, महत्वपूर्ण ठिकानों की रेकी और वीडियो कॉलिंग से डेटा ट्रांसफर

जांच में सामने आया है कि ये चारों आरोपी आधुनिक तकनीक और कूटभाषा (साइफर कोड्स) का इस्तेमाल कर रहे थे।

  • पाकिस्तानी हैंडलर्स से सीधा संपर्क: चारों संदिग्ध विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड वीडियो कॉलिंग ऐप्स के जरिए पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स के साथ लगातार टच में थे।
  • संवेदनशील डेटा लीक: ये देश के महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों, संवेदनशील स्थानों और बड़े अस्पतालों की रेकी करते थे, उनकी तस्वीरें व वीडियो बनाते थे और फिर उसे सीमा पार ट्रांसफर कर रहे थे।
  • युवाओं का ब्रेनवॉश: सुरक्षा एजेंसियों को पुख्ता इनपुट मिले हैं कि यह ग्रुप स्थानीय बेरोजगार और गुमराह युवाओं को बरगलाकर आतंकी नेटवर्क और स्लीपर सेल से जोड़ने के लिए उनका ब्रेनवॉश करने के काम में भी सक्रिय था।

नोएडा में हुई थी सीक्रेट मीटिंग, हथियार जुटाने का था प्लान

एटीएस सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार दिल्ली-एनसीआर से भी जुड़े हैं।

  • मार्च में हुई मुलाकात: आरोपी महकाब और गगनदीप सिंह इस साल मार्च के महीने में नोएडा में एक सीक्रेट मीटिंग के लिए मिले थे।
  • बड़ी आतंकी वारदात की साजिश: जांच में यह बात भी पुख्ता हुई है कि दोनों आरोपी आने वाले समय में उत्तर प्रदेश या देश के अन्य हिस्सों में किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने के मकसद से अवैध हथियारों (असलहे) और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था करने की फिराक में थे। एजेंसियां फिलहाल इनके पास से बरामद डिजिटल डिवाइस (मोबाइल, सिम कार्ड, लैपटॉप) का फॉरेंसिक डेटा खंगाल रही हैं।

ISI के इशारे पर गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट का खूनी नेक्सस

जांच एजेंसियों ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि यह पूरा स्लीपर सेल नेटवर्क पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के सीधे इशारे पर काम कर रहा था। आईएसआई भारत में अशांति और दहशत फैलाने के लिए पाकिस्तानी गैंगस्टर्स शहजाद भट्टी और आबिद जट का इस्तेमाल कर रही है। ये गैंगस्टर्स सोशल मीडिया के जरिए भारत के सीमावर्ती जिलों के युवाओं को पैसों का लालच देकर और उनका ब्रेनवॉश कर देश के खिलाफ खड़ा करने की बड़ी साजिश रच रहे थे।

यूपी एटीएस अब चारों संदिग्ध आतंकियों को स्थानीय अदालत में पेश कर उनकी कस्टडी रिमांड की मांग करेगी, ताकि इनके पूरे नेटवर्क, बैंक खातों में आए फंड और देश में मौजूद अन्य मददगारों (स्लीपर सेल्स) के ठिकानों का पता लगाकर उन्हें भी बेनकाब किया जा सके।

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