झांसी (राजधानी न्यूज डेस्क): वीरों की धरती झांसी में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पुलिस महकमे के साथ-साथ सियासी गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है। आईपीएल (IPL) मैचों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी के एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए झांसी पुलिस ने एक ऐसी कहानी का पर्दाफाश किया है, जिसमें प्यार, पैसा, धोखा और अपराध का कॉकटेल है। इस गिरोह का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि पुलिस का ही एक सिपाही रजत सिंह है, जो अपनी प्रेमिका के साथ मिलकर करोड़ों का काला कारोबार चला रहा था।

छापेमारी और बरामदगी: फ्लैट में मिला सोने का भंडार
एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति के निर्देशन में सीपरी बाजार थाना पुलिस ने शुक्रवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी कि पॉश कॉलोनी ‘रॉयल सिटी’ के फ्लैट नंबर LS9 में आईपीएल मैचों पर बड़े स्तर पर ऑनलाइन सट्टा खिलवाया जा रहा है।
जब पुलिस ने फ्लैट में छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी रह गई। पुलिस ने मौके से दो महिलाओं— यशस्वी द्विवेदी (24) और निशा खान (32) को गिरफ्तार किया। वहां रखे एक सोफे के पास से एक भारी ट्रॉली बैग बरामद हुआ। जब बैग खोला गया, तो उसमें नोटों की गड्डियां और सोने-चांदी के गहनों का अंबार लगा था।
बरामदगी का विवरण:
- सोने के 100-100 ग्राम के 9 बिस्किट।
- करीब 1.46 करोड़ रुपये का सोना और 1.55 करोड़ की कुल ज्वेलरी।
- 19 लाख रुपये नकद (कैश)।
- 11 लाख रुपये की चांदी।
12 महंगे मोबाइल और लैपटॉप।

यशस्वी द्विवेदी: दरोगा बनने की चाहत से ‘लिव-इन’ और जेल तक का सफर
गिरफ्तार की गई यशस्वी द्विवेदी की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। 24 वर्षीय यशस्वी बेहद शिक्षित है; उसने बीएड (B.Ed) किया था, टीचर बनने की कोशिश की और असफल होने पर एमटेक (M.Tech) में दाखिला लिया। पिछले महीने ही वह दरोगा भर्ती परीक्षा में शामिल हुई थी। वह पुलिस अधिकारी बनकर समाज सेवा करना चाहती थी, लेकिन सिपाही रजत सिंह के प्यार के चक्कर में उसने अपराध का रास्ता चुन लिया।

पुलिस के मुताबिक, रजत के कहने पर यशस्वी ने अपना परिवार छोड़ दिया था और पिछले 12 महीनों से रॉयल सिटी में रजत के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। वह रजत के सट्टा गिरोह के वित्तीय लेनदेन को संभालती थी। गिरफ्तारी के बाद उसके शब्द थे— “जो मुझे पत्नी का दर्जा नहीं दिला सका, उसने आखिरकार मुझे जेल पहुंचा दिया।”
सिपाही रजत सिंह: ‘खाकी’ को दागदार करने वाला मुख्य किरदार
इस पूरे सट्टा गिरोह का असली सूत्रधार सिपाही रजत सिंह (निवासी शमदपुर, हाथरस) है। रजत कोई मामूली अपराधी नहीं बल्कि एक शातिर दिमाग शख्स है। वह कई सालों तक स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) में तैनात रहा, जहां उसने अपराध जगत की बारीकियों को समझा और फिर उसी का इस्तेमाल सट्टा साम्राज्य खड़ा करने में किया।
विवादों से पुराना नाता: रजत सिंह महज 12 दिन पहले ही सुर्खियों में आया था जब उसने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में अपनी थार (THAR) गाड़ी से रिटायर्ड असिस्टेंट रजिस्ट्रार मनीराम वर्मा (70) को रौंद दिया था। इस हादसे में मनीराम की मौत हो गई थी। इस मामले में रजत जेल गया था और गुरुवार को ही वह जेल से छूटकर आया था। जेल से आते ही उसने फिर से सट्टे का काम संभाल लिया। हालांकि, एसएसपी ने उसकी संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए शुक्रवार को उसे सेवा से ब बर्खास्त कर दिया है।

भाजपा नेता आशीष उपाध्याय का कनेक्शन और गैंग की संरचना
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गैंग को भाजपा नेता आशीष उपाध्याय लीड कर रहा था। आशीष को 7 दिन पहले ही दिल्ली से गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरोह में शामिल अन्य प्रमुख आरोपी इस प्रकार हैं:
- सुमित साहू: निशा खान का मित्र और गिरोह का मुख्य सदस्य।
- विशेष भार्गव: सीपरी बाजार क्षेत्र का निवासी।
- प्रभात अग्रवाल: सट्टेबाजी के तकनीकी पहलुओं को संभालने वाला।
- निशा खान: सुमित साहू की महिला मित्र, जो पैसों के प्रबंधन में मदद करती थी।

भाजपा नेता आशीष उपाध्याय
पैसे के बंटवारे ने खुलवा दी ‘पोल’
सूत्रों का कहना है कि आईपीएल सीजन खत्म होने वाला था और सट्टे से कमाई गई करोड़ों की रकम और गहनों के बंटवारे को लेकर निशा और यशस्वी के बीच विवाद शुरू हो गया था। इसी बीच पुलिस फरार आरोपी सुमित की तलाश में उसके घर पहुंची, जहां से निशा का सुराग मिला। पुलिस ने जब निशा को कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने यशस्वी और रजत के रॉयल सिटी वाले फ्लैट का राज खोल दिया। उसने बताया कि यशस्वी सारा कैश और सोना लेकर झांसी छोड़कर भागने की फिराक में है।
पुलिस की अगली कार्रवाई
एसएसपी झांसी ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ सीपरी बाजार थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। वर्तमान में सिपाही रजत समेत 5 आरोपी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस यशस्वी के बैंक खातों की भी जांच कर रही है ताकि सट्टे से अर्जित की गई बेनामी संपत्ति का पता लगाया जा सके।
यह मामला दर्शाता है कि कैसे एक ‘सिस्टम’ के भीतर मौजूद व्यक्ति (सिपाही) तकनीक और रसूख का इस्तेमाल कर अपराध को फलने-फूलने देता है। झांसी में पकड़ी गई यह करोड़ों की खेप केवल एक ट्रेलर हो सकती है। सट्टेबाजी का यह नेटवर्क बुंदेलखंड से लेकर दिल्ली और ग्वालियर तक फैला हुआ है।





