लखनऊ/आगरा (राजधानी न्यूज): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और ताजनगरी आगरा के बीच चल रहे नकली दवाओं के एक संदिग्ध नेटवर्क का औषधि विभाग ने बड़ा खुलासा किया है। 6 मई को लखनऊ के दवा मंडी क्षेत्र अमीनाबाद में हुई ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद इस नेटवर्क के तार आगरा से जुड़े मिले हैं। विभाग ने नामी दवा कंपनी जायडस (Zydus) की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में संदिग्ध दवाओं का स्टॉक बरामद किया है और कई प्रतिष्ठानों को जांच के घेरे में लिया है।
जायडस की शिकायत और लखनऊ में पहली कार्रवाई
औषधि विभाग को सूचना मिली थी कि बाजार में प्रतिष्ठित कंपनी जायडस की ‘ऑक्सालजिन डीपी’ (Oxalgin DP) टैबलेट के नाम पर नकली दवाएं खपाई जा रही हैं। यह दवा मुख्य रूप से दर्द निवारक के रूप में उपयोग की जाती है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्य और विवेक सिंह की टीम ने लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में छापेमारी शुरू की।
बड़ी बरामदगी: टीम ने अमीनाबाद स्थित ‘वीडीएस फार्मा’ (VDS Pharma) पर छापा मारकर ऑक्सालजिन डीपी की 1050 स्ट्रिप बरामद कीं।
आगरा कनेक्शन: जब विभाग ने फर्म से इन दवाओं की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड मांगे, तो वीडीएस फार्मा ने ‘श्री बालाजी मेडिकल्स, आगरा’ का बिल प्रस्तुत किया। यहीं से जांच की दिशा आगरा की ओर मुड़ गई।

आगरा में 7000 स्ट्रिप सीज: बिना लाइसेंस वाले गोदाम का खुलासा
लखनऊ से मिले सुराग के आधार पर औषधि विभाग की टीम ने आगरा में ‘श्री बालाजी मेडिकल्स’ के ठिकानों पर दबिश दी। वहां जांच के दौरान एक बिना लाइसेंस वाले अवैध गोदाम का पता चला, जहां से ऑक्सालजिन डीपी की करीब 7000 स्ट्रिप्स बरामद हुईं। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से पूरे स्टॉक को सीज कर दिया है।
इसके अलावा, आगरा के फव्वारा क्षेत्र स्थित ‘श्री मेडिकल एजेंसी’ पर भी औषधि विभाग ने करीब 6 घंटे तक सघन जांच की। यहां टीम ने कंप्यूटर रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और खरीद-बिक्री के बिलों का बारीकी से मिलान किया।
अमीनाबाद की कई नामी फर्में जांच के घेरे में
लखनऊ के औषधि विभाग को आशंका है कि केवल वीडीएस फार्मा ही नहीं, बल्कि अमीनाबाद की कई अन्य फर्में भी इस नेटवर्क का हिस्सा हो सकती हैं। विभाग के सूत्रों के अनुसार, जिन प्रमुख प्रतिष्ठानों की वर्तमान में जांच की जा रही है, वे निम्नलिखित हैं:
- हर्षित एंटरप्राइजेज (संस्कार बिल्डिंग)
- वीएस फार्मा (सुल्तान मार्केट, नया गांव)
- अजका फार्मेसी (जीवनदान कॉम्प्लेक्स)
- सनी ट्रेडर्स (जे एंड के बिल्डिंग)
- दीप मेडिकल एजेंसी
इन सभी फर्मों पर दवाओं की सप्लाई और बिलिंग के रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली दवाओं की खेप कहां-कहां तक पहुंची है।
6 संदिग्ध दवाओं के नमूने लैब भेजे गए
छापेमारी के दौरान टीम ने केवल ऑक्सालजिन डीपी ही नहीं, बल्कि पेट दर्द, एंटी-एलर्जिक और हड्डी रोग से जुड़ी छह अन्य संदिग्ध दवाओं के नमूने भी लिए हैं। इन दवाओं की गुणवत्ता पर संदेह होने के कारण इन्हें राजकीय प्रयोगशाला (Lab) में परीक्षण के लिए भेजा गया है।
ड्रग इंस्पेक्टर विवेक सिंह ने स्पष्ट किया कि जब तक लैब की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इन दवाओं की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही संबंधित फर्मों के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण या एफआईआर जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसोसिएशन का रुख
इस पूरे घटनाक्रम पर लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश चंद्र साह और महामंत्री प्रदीप चंद्र जैन ने कहा कि औषधि विभाग की टीम ने रूटीन जांच और सैंपलिंग की प्रक्रिया पूरी की है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि विभाग की ओर से अभी तक किसी दवा के आधिकारिक रूप से ‘नकली’ होने की लिखित पुष्टि नहीं हुई है।




