राज्यपाल से मिले CM योगी: रविवार को शपथ ले सकते हैं 6 नए मंत्री- मनोज पांडेय, पूजा पाल और भूपेंद्र चौधरी की एंट्री लगभग तय

राज्यपाल से मिले CM योगी

लखनऊ (राजधानी न्यूज): उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन बड़े बदलावों का साक्षी बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का दूसरा विस्तार रविवार को राजभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में होगा। इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम की पटकथा शनिवार शाम को उस समय लिखी गई, जब सीएम योगी आदित्यनाथ अचानक राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मिलने राजभवन पहुंचे। मुख्यमंत्री के साथ अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय प्रसाद भी मौजूद रहे, जहाँ उन्होंने नए मंत्रियों की आधिकारिक सूची राज्यपाल को सौंपी।

कैबिनेट का गणित: 54 से बढ़कर 60 हो सकती है मंत्रियों की संख्या

वर्तमान में मुख्यमंत्री को मिलाकर यूपी सरकार में कुल 54 मंत्री हैं। नियमानुसार मंत्रिमंडल में अधिकतम 60 मंत्री हो सकते हैं, जिसका अर्थ है कि 6 नए चेहरों के लिए जगह खाली है। हालांकि, चर्चा यह भी है कि इस विस्तार में केवल नए नाम ही नहीं जुड़ेंगे, बल्कि खराब प्रदर्शन करने वाले कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी की जा सकती है। यदि मंत्रियों को हटाया जाता है, तो रविवार को शपथ लेने वाले नए चेहरों की संख्या बढ़ भी सकती है।

योगी 2.0 सरकार का पहला विस्तार 5 मार्च, 2024 को हुआ था, जिसमें ओमप्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, अनिल कुमार और सुनील शर्मा ने शपथ ली थी। अब लगभग दो साल बाद होने जा रहा यह विस्तार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है।

मंत्रीमंडल में संभावित चेहरे

बगावत का इनाम: मनोज पांडेय और पूजा पाल का मंत्री बनना तय

इस विस्तार की सबसे बड़ी चर्चा समाजवादी पार्टी (सपा) से बगावत करने वाले नेताओं को लेकर है।

मनोज पांडेय: रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक और सपा के पूर्व मुख्य सचेतक मनोज पांडेय का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। वे अवध और पूर्वांचल के बड़े ब्राह्मण चेहरा हैं और सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।

पूजा पाल: कौशांबी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल ने 2024 राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में वोट दिया था। उनके संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन और दलित-पिछड़ा वर्ग में उनकी पकड़ को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलना निश्चित लग रहा है।

इन दिग्गजों की वापसी और नए चेहरों पर दांव

योगी सरकार इस बार जातीय समीकरणों को साधने के लिए कई अनुभवी और युवा चेहरों को मौका देने जा रही है:

1. भूपेंद्र सिंह चौधरी (जाट चेहरा)

मुरादाबाद के रहने वाले और यूपी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। उन्हें 2022 में कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दिलाकर संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पश्चिमी यूपी में जाटों को साधने के लिए वह पार्टी का सबसे मजबूत चेहरा हैं।

2. श्रीकांत शर्मा और डॉ. महेंद्र सिंह (अनुभवी वापसी)

मथुरा से विधायक श्रीकांत शर्मा और जलशक्ति मंत्री रह चुके डॉ. महेंद्र सिंह की वापसी की प्रबल संभावनाएं हैं। श्रीकांत शर्मा ने ऊर्जा मंत्री के रूप में बेहतर काम किया था और वे राष्ट्रीय मीडिया सेल के प्रभारी भी रह चुके हैं। वहीं, डॉ. महेंद्र सिंह केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद माने जाते हैं।

3. दलित और पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व

कृष्णा पासवान: खागा (फतेहपुर) से 4 बार की विधायक कृष्णा पासवान दलित समाज का बड़ा चेहरा हैं।

हंसराज विश्वकर्मा: वाराणसी से एमएलसी हंसराज पिछले 34 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं और पिछड़ा वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ है।

रामचंद्र प्रधान: नाई समाज से आने वाले एमएलसी रामचंद्र प्रधान की दावेदारी भी काफी मजबूत मानी जा रही है।

सुरेंद्र दिलेर: अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर भाजपा के उभरते हुए दलित युवा नेता हैं।

4. अवध और पूर्वांचल का संतुलन

गोविंद नारायण शुक्ला: अमेठी के रहने वाले और गोरखपुर क्षेत्र के प्रभारी गोविंद नारायण शुक्ला को ब्राह्मण कोटे से जगह मिल सकती है।

आशा मौर्य: सीतापुर की महमूदाबाद सीट से विधायक आशा मौर्य को महिला और पिछड़ा वर्ग कोटे से मंत्री बनाया जा सकता है।

आधी आबादी को प्रतिनिधित्व देने की तैयारी

यूपी विधानसभा में वर्तमान में भाजपा और उसके सहयोगियों की कुल 35 महिला विधायक हैं, लेकिन सरकार में केवल 5 महिला मंत्री हैं। भाजपा महिला आरक्षण के मुद्दे को भुनाने के लिए इस बार मंत्रिमंडल में महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ाकर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश कर रही है। कृष्णा पासवान और आशा मौर्य इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

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