लखनऊ (राजधानी न्यूज): उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद में महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) विधेयक को लेकर बुधवार को जबरदस्त हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुई इस तीखी बहस में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर रहा। एक तरफ सरकार ने विपक्ष को ‘महिला विरोधी’ करार दिया, तो वहीं विपक्ष ने विधेयक को केवल ‘राजनीतिक हथकंडा’ बताते हुए इसे खारिज कर दिया।

विपक्ष का वार: “यह आरक्षण नहीं, परिसीमन का छलावा है”
विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने सरकार को घेरे में लेते हुए कहा कि भाजपा इस विधेयक के जरिए प्रदेश को गुमराह कर रही है।
आरक्षण पर सवाल: विपक्ष का तर्क है कि 33 फीसदी महिला आरक्षण 2023 में ही पारित हो चुका है। सरकार जिस बिल को पेश कर रही है, वह वास्तव में ‘परिसीमन’ से जुड़ा है।
कोटा-विदिन-कोटा: सपा नेता ने मांग की कि 33 फीसदी आरक्षण के भीतर पिछड़ी, दलित और मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण (Quota) तय किया जाए। उन्होंने मुलायम सिंह यादव को याद करते हुए कहा कि पंचायतों में महिलाओं को सम्मान सपा की देन है।
हिटलर से तुलना: राजेंद्र चौधरी ने भाजपा मंत्रियों की कार्यशैली की तुलना ‘हिटलर के प्रचार मंत्री गार्बल्स’ से करते हुए इसे संविधान का उल्लंघन बताया। वहीं, शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि भाजपा राजनीतिक नफा-नुकसान देखकर काम कर रही है और यह सब 2027 के चुनाव की घबराहट है।

सीएम योगी का पलटवार: “सपा-कांग्रेस गिरगिट की तरह बदलते हैं रंग”
सदन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘जन्मजात महिला विरोधी’ बताया।
पुरानी घटनाओं की याद: सीएम ने सपा को ‘स्टेट गेस्ट हाउस कांड’ की याद दिलाते हुए कहा कि जिन्हें महिलाओं के सम्मान की चिंता नहीं, वे आज आरक्षण की बात कर रहे हैं।
नैतिक साहस की चुनौती: योगी ने विपक्ष को चुनौती दी कि अगर उनमें नैतिक साहस है, तो वे चर्चा में भाग लें और बताएं कि उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक का विरोध क्यों किया।

दोहरा चरित्र: योगी ने कहा कि विपक्ष गिरगिट की तरह रंग बदलता है। उन्होंने सपा-कांग्रेस के सदस्यों से कहा कि अगर उन्हें अपने नेताओं की गलती का अहसास है, तो वे सदन में माफी मांगें या निंदा प्रस्ताव पारित करें।
महिला सदस्यों ने भरी हुंकार: “हमें भीख नहीं, अधिकार चाहिए”
सदन में मौजूद महिला मंत्रियों और सदस्यों ने विपक्ष के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई।
अपमान नहीं भूलेंगी महिलाएं: सदस्य डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने कहा कि नारी सब कुछ भूल सकती है, लेकिन अपमान नहीं। उन्होंने विपक्ष पर ‘महिला अधिकारों की भ्रूण हत्या’ का आरोप लगाया।
अधिकारों की लड़ाई: राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि 17 अप्रैल का दिन काला दिन था। महिलाओं को अब भीख नहीं, अधिकार चाहिए।

सशक्तीकरण पर जोर: मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि जब महिलाएं संसद जाएंगी, तभी अपनी बात खुद रख सकेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधी आबादी की कोई जाति नहीं होती, वह केवल ‘महिला’ है।



