प्रतापगढ़ (राजधानी न्यूज): उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘कुंडा के क्षत्रप’ कहे जाने वाले रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ राजा भैया की अगली पीढ़ी ने सियासी मैदान में औपचारिक कदम रख दिया है। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दोनों बेटों, शिवराज प्रताप सिंह और बृजराज प्रताप सिंह ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। कुंडा की जनता अब इन्हें ‘बड़े राजा’ और ‘छोटे राजा’ के नाम से पुकार रही है।
सिंधिया स्कूल से पढ़ाई और जेल में जन्म का संघर्ष
दोनों भाइयों का जन्म साल 2003 में उस कठिन समय में हुआ था जब राजा भैया पोटा (POTA) के तहत जेल में थे। काफी समय तक वे अपने बेटों का चेहरा तक नहीं देख पाए थे।
शिक्षा: शिवराज और बृजराज ने ग्वालियर के प्रतिष्ठित सिंधिया स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की है।
सियासी ककहरा: 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों भाई अपने पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रचार करते नजर आए थे, जहां से उन्होंने राजनीति की बारीकियों को सीखना शुरू किया।

पिता की तरह सादगी और लग्जरी का संगम
कुंडा के युवाओं के बीच दोनों भाई खासे लोकप्रिय हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि दोनों में अपने पिता जैसी ही सादगी और अनुशासन है:
जातिविहीन राजनीति: स्थानीय निवासी पंकज सरोज बताते हैं कि शिवराज और बृजराज बिना किसी भेदभाव के बीमारों का इलाज कराने और गरीबों के घर निमंत्रण में पहुंचने के लिए जाने जाते हैं।
बेंती पैलेस में दरबार: राजा भैया की अनुपस्थिति में शिवराज खुद बेंती पैलेस में फरियादियों की समस्याएं सुनते हैं।
लग्जरी का शौक: पिता की तरह बेटों को भी महंगी गाड़ियों का शौक है। इनके बेड़े में 5 करोड़ की रेंज रोवर ऑटोबायोग्राफी, लैंड रोवर डिफेंडर और मर्सिडीज जैसी गाड़ियां शामिल हैं। घुड़सवारी और एटीवी (ATV) बाइक चलाना भी इनका पसंदीदा शौक है।
“पार्टी तय करेगी भविष्य”
राजनीति में आने के सवाल पर दोनों भाइयों का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उनका कहना है कि वे बचपन से अपने पिता की ‘सेवानीति’ को देखकर बड़े हुए हैं और उन्हीं से प्रेरित हैं। चुनाव लड़ने के सवाल पर वे कहते हैं, “यह हमारा व्यक्तिगत फैसला नहीं होगा, बल्कि पार्टी तय करेगी कि हमें कब और कहां से चुनावी मैदान में उतरना है।”



