बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े कथित अपमान और यूजीसी के नए नियमों को लेकर नाराज अलंकार अग्निहोत्री ने पद से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने दावा किया कि उन्हें डीएम आवास में करीब 20 मिनट तक रोके रखा गया और वहां उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि “मुझे बंधक बनाया गया था और गालियां दी गईं। मेरी जान को खतरा है।” इस बयान के सामने आने के बाद मामला और तूल पकड़ता जा रहा है।
उनके आवास के बाहर समर्थकों और ब्राह्मण संगठनों के नेताओं का जमावड़ा लगा रहा, वहीं सपा और कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता भी उनसे मिलने पहुंचे। कई जगहों पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
पोस्टर और पांच पन्नों के पत्र से जाहिर की नाराजगी
इस्तीफे से पहले अलंकार अग्निहोत्री अपने सरकारी आवास के बाहर हाथ में पोस्टर लेकर खड़े नजर आए थे। उस पोस्टर पर यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने, शंकराचार्य और संतों के कथित अपमान का विरोध करने और राजनीतिक दलों के खिलाफ नारे लिखे गए थे।
इसके साथ ही उन्होंने एक पांच पन्नों का पत्र भी जारी किया, जिसमें प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुई कथित घटना का जिक्र किया गया। पत्र में उन्होंने लिखा कि ऐसी घटनाएं किसी भी ब्राह्मण समाज के व्यक्ति को भीतर तक झकझोर देती हैं और इससे यह संदेश जाता है कि साधु-संतों और ब्राह्मणों का सम्मान कम हो रहा है।
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पत्र में सवाल उठाया कि क्या समाज के एक वर्ग को निशाना बनाए जाने जैसी स्थिति बन रही है। इन बयानों के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि उन्हें मनाने के लिए एडीएम समेत तीन अन्य अधिकारी उनके आवास पर पहुंचे थे और करीब एक घंटे तक बातचीत चली, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
डीएम आवास में रोके जाने का आरोप, जान को खतरे की बात
इस्तीफा देने के बाद मीडिया के सामने आए अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें डीएम आवास बुलाया गया था, जहां करीब 20 मिनट तक बाहर जाने नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान उन्होंने लखनऊ में सचिव स्तर के अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर अपनी स्थिति बताई।
उनका कहना है कि जब मामला मीडिया तक पहुंच गया, तब जाकर उन्हें वहां से जाने दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि डीएम कार्यालय में लखनऊ से आए एक फोन कॉल के दौरान उनके खिलाफ अपशब्द कहे गए।
अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि उन्हें दो घंटे के भीतर सरकारी आवास खाली करने के निर्देश मिले हैं और इस वजह से वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समर्थकों ने भी आशंका जताई है कि उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, उनके आवास पर लगाए गए टेंट को पुलिस ने हटवा दिया, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। प्रशासन की ओर से फिलहाल इन आरोपों पर कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ब्राह्मण संगठनों और राजनीतिक दलों का समर्थन, कई जगह प्रदर्शन
अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में ब्राह्मण संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। बरेली में उनके आवास के बाहर नेताओं ने नारेबाजी की और सरकार से पूरे मामले की जांच की मांग की।
सपा और कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता भी उनसे मिलने पहुंचे और समर्थन जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार चिंताजनक है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि अलंकार अग्निहोत्री का परिवार कानपुर में रहता है और मौजूदा हालात को देखते हुए परिजन भी चिंतित हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह मामला अब केवल प्रशासनिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रंग भी ले चुका है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बयान, सरकार को चेतावनी
नगर मजिस्ट्रेट के इस्तीफे पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का सम्मान सनातन परंपरा को मानने वालों के दिलों में गहराई से जुड़ा है और उसे आहत करने के परिणाम क्या हो सकते हैं, इसका अंदाजा इस घटनाक्रम से लगाया जा सकता है।
उनके बयान के बाद यह मुद्दा और व्यापक चर्चा में आ गया है। धार्मिक संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
अलंकार अग्निहोत्री वर्ष 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं और उन्होंने परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल की थी। इससे पहले वे अपने कार्यालय में बजरंगबली की तस्वीर लगाने को लेकर भी चर्चा में रह चुके हैं, जिस पर भीम आर्मी की ओर से विरोध दर्ज कराया गया था और कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई थी।
बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे और लगाए गए आरोपों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों को नई चुनौती के सामने ला खड़ा किया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और जिला प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या आरोपों की जांच के आदेश दिए जाते हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की आशंका जताई जा रही है।


