शंकराचार्य ने बनाई ‘चतुरंगिणी सेना’: गौ रक्षा के लिए 2 लाख से ज्यादा लोग होंगे भर्ती; ‘टोकने, रोकने और ठोकने’ का दिया मंत्र

शंकराचार्य

वाराणसी:

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। केदार घाट स्थित विद्यामठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक विशेष सेना के गठन का ऐलान किया है, जिसे ‘चतुरंगिणी सेना’ नाम दिया गया है। इस सेना का मुख्य उद्देश्य गौ हत्या को रोकना और सनातनी समाज पर होने वाले अत्याचारों का मुकाबला करना है। शुरुआती चरण में 27 लोगों की एक समिति नियुक्त की गई है, जिसके सर्वोच्च सेना प्रमुख स्वयं शंकराचार्य होंगे।

शंकराचार्य ने इस सेना के कार्य करने के तरीके को स्पष्ट करते हुए कहा कि चतुरंगिणी सेना अन्याय करने वालों को पहले ‘टोकने’, फिर ‘रोकने’ और अंततः आवश्यकता पड़ने पर ‘ठोकने’ का काम करेगी। सेना के सदस्यों के लिए विशेष ड्रेस कोड तय किया गया है, जिसमें वे पीले रंग के वस्त्र और हाथ में ‘परशु’ (फरसा) धारण करेंगे।

10 महीने में 2.18 लाख सैनिकों की भर्ती का लक्ष्य: माघ मेले में दिखेगी ताकत

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस सैन्य संगठन के विस्तार की एक व्यापक रूपरेखा साझा की है:

  • विशाल नेटवर्क: आगामी 10 महीनों के भीतर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश से लगभग 2,18,700 लोगों को इस सेना से जोड़ने की योजना है।
  • पहली झांकी: चतुरंगिणी सेना का भव्य स्वरूप पहली बार प्रयागराज के माघ मेले में देश के सामने आएगा।
  • भय मुक्ति का संकल्प: शंकराचार्य के अनुसार, आज हिंदुओं के मन में व्याप्त भय को दूर कर उन्हें सत्य के मार्ग पर लाना इस सेना की प्राथमिकता होगी।

भगवान परशुराम की तर्ज पर ‘परशु’ धारण करेगी सेना; कानूनी प्रक्रिया का होगा पालन

हथियार और कानून के सवाल पर शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि सेना पूरी तरह से कानूनी दायरे में रहकर काम करेगी। उन्होंने बताया:

  1. रजिस्ट्रेशन: सेना का विधिवत पंजीकरण (Registration) कराया जाएगा और सभी कानूनी पहलुओं को धरातल पर उतारा जाएगा।

  2. शस्त्र लाइसेंस: चूंकि सेना के जवान भगवान परशुराम की तर्ज पर ‘परशु’ धारण करेंगे, इसलिए यदि इसके लिए किसी लाइसेंस की आवश्यकता होगी, तो कानूनी रूप से उसे भी प्राप्त किया जाएगा।

  3. सुरक्षा कवच: यह शस्त्र केवल आत्मरक्षा, सनातन की सुरक्षा और गौ माता की रक्षा के लिए प्रतीकात्मक और सुरक्षात्मक रूप से उपयोग किया जाएगा।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • संगठन का नाम: चतुरंगिणी सेना।

  • संस्थापक: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती।

  • पहचान: पीला वस्त्र और परशु (फरसा)।

  • लक्ष्य: गौ रक्षा और सनातनियों पर अत्याचार रोकना।

  • भर्ती लक्ष्य: 2 लाख 18 हजार 700 सैनिक।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *