आजमगढ़/वाराणसी: उत्तर प्रदेश की सियासत में एनडीए (NDA) के दो प्रमुख सहयोगी दल— सुभासपा (SBSP) और निषाद पार्टी— आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है जिसमें उन्होंने आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया है। इस पर पलटवार करते हुए कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने राजभर के बयान को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ करार दिया है।
संजय निषाद की दोटूक: “अतरौलिया हमारी है, समझौता नहीं करेंगे”
वाराणसी में मीडिया से बातचीत करते हुए संजय निषाद ने राजभर के दावों पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा:
निषाद बाहुल्य सीट: अतरौलिया सीट निषाद बिरादरी की बहुलता वाली सीट है। 2022 के चुनाव में गठबंधन के तहत यह सीट निषाद पार्टी को मिली थी, जहाँ हमारे प्रत्याशी प्रशांत सिंह रनर रहे थे।
मर्यादा का उल्लंघन: संजय निषाद ने कहा, “ओम प्रकाश राजभर ने बिना किसी चर्चा के यह ऐलान कर मर्यादा तोड़ी है। अगर हम भी उनकी सुरक्षित सीटों पर दावेदारी शुरू कर दें, तो क्या उन्हें ठीक लगेगा?”
निर्दलीय लड़ने की चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि गठबंधन में अतरौलिया सीट उन्हें नहीं मिली, तो निषाद पार्टी वहां से अपना प्रत्याशी निर्दलीय या सिंबल पर लड़ाएगी। उन्होंने भाजपा को ‘बड़ा भाई’ बताते हुए कहा कि सीटों का फैसला सहमति से होना चाहिए।
राजभर का प्रहार: “आजमगढ़ किसी का गढ़ नहीं, सब चंगा है”
वहीं, पिछले तीन महीनों से आजमगढ़ का दौरा कर रहे ओम प्रकाश राजभर ने अतरौलिया समेत सभी 10 सीटों पर तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है।
10 सीटों पर तैयारी: राजभर ने कहा कि सुभासपा आजमगढ़ की हर सीट पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आजमगढ़ किसी की निजी जागीर नहीं है।
अखिलेश यादव पर तंज: राजभर ने सपा प्रमुख पर हमला बोलते हुए कहा, “जब मुजफ्फरनगर दंगों की आग में जल रहा था, तब अखिलेश सैफई में नाच देख रहे थे। सपा सरकार में कर्फ्यू लगता था, लेकिन योगी सरकार में सब चंगा है।”
मुद्दों से भटकाने का आरोप: राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव रोहिणी आयोग और पिछड़ों के आरक्षण पर बात करने के बजाय ‘कोडीन भैया’ और ‘कालीन भैया’ जैसे फिल्मी जुमलों में जनता को उलझा रहे हैं।
2022 के समीकरण और वर्तमान खींचतान
2022 के विधानसभा चुनाव में अतरौलिया सीट पर निषाद पार्टी के प्रशांत सिंह और सपा के संग्राम यादव के बीच मुकाबला था। निषाद पार्टी यहाँ दूसरे नंबर पर रही थी। अब राजभर की नजर इस सीट पर टिकने से एनडीए के भीतर आंतरिक कलह के संकेत मिल रहे हैं। संजय निषाद ने साफ किया कि अतरौलिया के निषाद समाज की ताकत को राजभर नजरअंदाज नहीं कर सकते।



