शक्ति की भक्ति का महापर्व: चैत्र नवरात्रि पर ऐसे करें ‘कलश स्थापना’, सुख-समृद्धि के लिए वास्तु सम्मत ये विधि है सबसे श्रेष्ठ

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना की 'अचूक' विधि; एक गलती से रूठ सकती हैं मां दुर्गा, नोट करें नियम

नवरात्रि कलश

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 के पावन पर्व की शुरुआत के साथ ही भक्तों में उत्साह की लहर है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष शास्त्रीय महत्व माना गया है। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि साक्षात देवी दुर्गा का अपने घर में आह्वान करने की एक पवित्र प्रक्रिया है। मान्यता है कि यदि सही विधि और नियमों के साथ कलश स्थापित किया जाए, तो पूरे नौ दिनों तक घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माता रानी की असीम कृपा बरसती है। लखनऊ और उत्तर प्रदेश के तमाम शक्तिपीठों सहित घर-घर में इस बार कलश स्थापना के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं।

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, घटस्थापना के लिए घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा सबसे उत्तम मानी गई है। स्थापना से पहले उस स्थान को गंगाजल से पवित्र करना अनिवार्य है। कलश को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, इसके लिए लकड़ी की चौकी या पाटे का उपयोग करें और उस पर लाल या पीला नया कपड़ा बिछाएं। तांबे या मिट्टी के कलश में शुद्ध जल भरकर उसमें सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ, दूर्वा और अक्षत डालना शुभ फलदायी होता है। कलश के मुख पर 5 या 7 आम के पत्ते रखकर उस पर नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर स्थापित करना चाहिए।

सावधानी हटी तो पूजा अधूरी! अखंड ज्योत और सूने घर को लेकर बरतें ये सावधानी; भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां

नवरात्रि की पूजा में जितनी श्रद्धा जरूरी है, उतनी ही सावधानी भी। जानकारों का कहना है कि एक बार कलश स्थापित होने के बाद उसे नौ दिनों तक अपनी जगह से बिल्कुल नहीं हिलाना चाहिए। यदि आप घर में अखंड ज्योति प्रज्वलित कर रहे हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि घर को कभी भी सूना (अकेला) छोड़कर न जाएं। मां दुर्गा की भक्ति के इन नौ दिनों में मन की शुद्धता और आचरण का संयम सबसे बड़ी पूजा है।

इन बातों का रखें विशेष ख्याल:

  • क्रोध और अपशब्द: नवरात्रि की पवित्र अवधि में किसी का अपमान करने या क्रोध करने से पूजा का फल नष्ट हो जाता है।

  • अखंड ज्योत: ज्योत की लौ हमेशा प्रज्वलित रहनी चाहिए और इसके लिए शुद्ध देसी घी या तिल के तेल का ही उपयोग करें।

  • सात्विक जीवन: घर में तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों को प्रवेश न करने दें।

  • प्रथम पूज्य: कलश स्थापना के साथ सबसे पहले भगवान गणेश की वंदना करें और फिर माता रानी की आरती से पूजन संपन्न करें।

चैत्र नवरात्रि के दौरान मिट्टी के पात्र में जौ (ज्वारे) बोना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इनकी वृद्धि परिवार की सुख-संपन्नता का प्रतीक होती है। इस विधि का पालन कर आप भी अपने घर में मां भगवती का स्वागत कर सकते हैं।

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