लखनऊ विश्वविद्यालय में बड़ी कार्रवाई: छात्रा को ‘डार्लिंग’ कहने वाला असिस्टेंट प्रोफेसर निलंबित; 15 दिन में बर्खास्तगी का अल्टीमेटम

छात्रा को 'डार्लिंग' कहने वाला असिस्टेंट प्रोफेसर निलंबित

लखनऊ (राजधानी न्यूज): लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) प्रशासन ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन कार्य समिति (एग्जीक्यूटिव काउंसिल) की आपात बैठक बुलाकर एक बेहद बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। बीएससी (BSc) थर्ड ईयर की छात्रा को ‘डार्लिंग’ कहने और पेपर लीक का लालच देकर यौन शोषण का प्रयास करने के आरोपी जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। 3 सदस्यीय उच्चस्तरीय अनुशासन समिति की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह बड़ी कार्रवाई की है।

शुरुआती जांच में इन 4 गंभीर आरोपों में दोषी पाए गए प्रोफेसर

सोमवार को गठित की गई डिसीप्लिनरी कमिटी की फाइंडिंग्स को मंगलवार की बैठक में पटल पर रखा गया। जांच समिति की अंतरिम रिपोर्ट में डॉ. परमजीत सिंह पर लगे निम्नलिखित आरोप प्रथम दृष्टया (Prima Facie) पूरी तरह सही पाए गए हैं:

  1. यौन शोषण का प्रयास: प्रश्न-पत्र (पेपर) लीक करने का लालच देकर छात्रा का शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करना और शिक्षक आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन।
  2. पेपर लीक की स्वीकारोक्ति: गोपनीय परीक्षा सूचना (क्वेश्चन पेपर लीक) साझा करने की बात करना और इस कृत्य को आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के समक्ष आधिकारिक रूप से स्वीकार करना।
  3. विश्वविद्यालय की साख को ठेस: अपने अनैतिक और अमर्यादित कार्य द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिष्ठा, साख और अकादमिक निष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचाना।
  4. गाइडलाइंस का उल्लंघन: विशाखा गाइडलाइंस और यूजीसी (UGC) विनियम 2015 के अंतर्गत कार्यस्थल पर गंभीर यौन उत्पीड़न और अशोभनीय व्यवहार करना।

चार्जशीट जारी, 15 दिनों में देना होगा लिखित जवाब

निलंबन की कार्रवाई के साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी शिक्षक डॉ. परमजीत सिंह को आधिकारिक आरोप-पत्र (चार्जशीट) जारी कर दिया है।

  • मांगा पक्ष: आरोपी प्रोफेसर को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। उन्हें 15 दिनों के भीतर इस चार्जशीट का लिखित स्पष्टीकरण देना होगा।
  • सेवा समाप्ति की चेतावनी: विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर आरोपी प्रोफेसर का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके खिलाफ सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) जैसी सबसे कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने भेजा था जेल

इस पूरे शर्मनाक मामले की शुरुआत बीते शुक्रवार को हुई थी, जब असिस्टेंट प्रोफेसर और बीएससी की छात्रा के बीच बातचीत का एक आपत्तिजनक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।

  • कैंपस में हुआ था भारी हंगामा: ऑडियो सामने आने के बाद एबीवीपी (ABVP) से जुड़े छात्रों ने जूलॉजी विभाग और कैंपस में आरोपी शिक्षक के खिलाफ उग्र प्रदर्शन और नारेबाजी की थी।
  • हसनगंज थाने में FIR: हंगामा बढ़ता देख परीक्षा नियंत्रक की ओर से हसनगंज थाने में तहरीर दी गई, जिसके बाद पेपर लीक और अन्य धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। पुलिस ने शुक्रवार शाम को ही आरोपी शिक्षक को कैंपस से हिरासत में ले लिया था और अगले दिन शनिवार को उन्हें जेल भेज दिया गया था।
  • आईसीसी की रिपोर्ट: इस बीच इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (ICC) ने पीड़ित छात्रा के आरोपों की जांच कर सोमवार को ही अपनी रिपोर्ट कार्य समिति को सौंप दी थी, जिसके बाद मंगलवार को सस्पेंशन की अंतिम मुहर लग गई।

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