लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे ताकतवर परिवारों में से एक, ‘सैफई कुनबे’ से एक ऐसी खबर आई जिसने न केवल राजनीतिक गलियारों को बल्कि आम जनता को भी स्तब्ध कर दिया। समाजवादी पार्टी के संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। महज 38 वर्ष की आयु में हुई इस मौत ने कई अनसुलझे सवालों और एक उतार-चढ़ाव भरी दास्तां को पीछे छोड़ दिया है।
प्रतीक यादव एक ऐसे व्यक्तित्व थे जो सत्ता के केंद्र में पैदा होने के बावजूद राजनीति की मुख्यधारा से कोसों दूर रहे। जहां उनके परिवार का हर सदस्य राजनीति में सक्रिय था, वहीं प्रतीक ने अपनी एक अलग दुनिया बसाई थी—एक ऐसी दुनिया जो फिटनेस, लग्जरी कारों और रियल एस्टेट के इर्द-गिर्द घूमती थी।

बचपन का संघर्ष: टूटे परिवार से ‘मुलायम’ के साये तक
प्रतीक यादव का जन्म 7 जुलाई 1987 को फर्रुखाबाद के व्यवसायी चंद्रप्रकाश गुप्ता के घर हुआ था। उनकी मां साधना गुप्ता एक नर्स थीं। प्रतीक की जिंदगी में संघर्ष जन्म के एक साल बाद ही शुरू हो गया था, जब उनके पिता ने उनकी मां को छोड़ दिया। साल 1990 में उनके माता-पिता का आधिकारिक रूप से तलाक हो गया और नन्हे प्रतीक की दुनिया केवल अपनी मां तक सिमट कर रह गई।
उस समय साधना गुप्ता सैफई मेडिकल कॉलेज में तैनात थीं। नियति ने एक नया मोड़ तब लिया जब मुलायम सिंह यादव की माता मूर्ति देवी की तबीयत बिगड़ी। अस्पताल में एक नर्स मूर्ति देवी को गलत इंजेक्शन लगाने जा रही थी, जिसे साधना ने अपनी सतर्कता से रोक दिया। इस घटना ने मुलायम सिंह यादव को गहराई से प्रभावित किया और यहीं से साधना और मुलायम के रिश्तों की शुरुआत हुई।
सालों तक इस रिश्ते को सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन 2007 में मुलायम सिंह यादव ने सुप्रीम कोर्ट में आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक हलफनामा देकर स्वीकार किया कि साधना गुप्ता उनकी पत्नी हैं और प्रतीक उनका बेटा है। इस तरह प्रतीक को वह नाम और पहचान मिली जिसे ‘मुलायम’ साया कहा जाता है।
शिक्षा और करियर: राजनीति के बजाय चुना कारोबार का रास्ता
प्रतीक यादव की शुरुआती शिक्षा लखनऊ के प्रतिष्ठित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS) में हुई। इसके बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीकॉम किया और उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन चले गए। वहां उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से एमबीए की डिग्री हासिल की।
जब वे भारत लौटे, तो कयास लगाए जा रहे थे कि वे भी सैफई परिवार के अन्य सदस्यों की तरह राजनीति के मैदान में उतरेंगे। खुद पिता मुलायम सिंह चाहते थे कि प्रतीक चुनाव लड़ें, लेकिन प्रतीक का मन फाइलों और रैलियों में नहीं, बल्कि कंक्रीट और फिटनेस में था। उन्होंने रियल एस्टेट में अपना हाथ आजमाया और लखनऊ में अपना व्यवसाय स्थापित किया।
फिटनेस का जुनून: जब पिता के चैलेंज ने बदल दी पहचान
प्रतीक यादव की पहचान केवल एक ‘बिजनेसमैन’ के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘फिटनेस आइकन’ के रूप में भी थी। एक समय उनका वजन 103 किलो तक पहुंच गया था। मुलायम सिंह यादव ने जब उन्हें इस हालत में देखा तो उन्होंने एक पिता की तरह उन्हें चुनौती दी: “वजन कम करो, तो तुम्हें बड़ा इनाम देंगे”।
प्रतीक ने इस चुनौती को जुनून की तरह लिया और कड़ी मेहनत से 36 किलो वजन घटाया। यहीं से उन्हें बॉडी बिल्डिंग का शौक लगा। उन्होंने

फिटनेस के साथ-साथ उन्हें लग्जरी कारों का भी बेहद शौक था; उनके गैरेज में लैंबोर्गिनी और पोर्शे जैसी महंगी गाड़ियां शान बढ़ाती थीं।
अपर्णा के साथ चर्चित लव स्टोरी और उतार-चढ़ाव
प्रतीक और भाजपा नेता अपर्णा बिष्ट यादव की प्रेम कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं रही।

लगभग 8-10 साल के लंबे रिलेशनशिप के बाद 2011 में सैफई में उनकी शाही शादी हुई।
हालांकि, हाल के वर्षों में प्रतीक का निजी जीवन चर्चाओं में रहा। इसी साल जनवरी में उन्होंने अचानक सोशल मीडिया पर तलाक का ऐलान कर दिया था, जिससे हर कोई चौंक गया था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने अपनी पत्नी अपर्णा के साथ ‘All is Good’ लिखकर सुलह की खबर भी साझा की।
अंतिम दिन और बीमारी का रहस्य
प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों की धमनियों में रुकावट) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन इसकी जानकारी परिवार के बाहर बहुत कम लोगों को थी।
करीबी सूत्रों के अनुसार:
- 30 अप्रैल: प्रतीक की तबीयत अचानक बिगड़ी और उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया。
- 3 मई: उनकी हालत में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन वे डॉक्टरों की अनुमति के बिना ही अस्पताल से घर चले आए थे。
- बुधवार सुबह: प्रतीक को जब सिविल अस्पताल लाया गया, तब उनकी पल्स गिर चुकी थी और हृदय गति रुक गई थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया。

प्रतीक यादव एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने अपनी कहानी सोशल मीडिया के जरिए दुनिया को बताई, लेकिन अपनी खामोशी से बहुत कुछ छुपा भी लिया। उनकी मौत ने यादव परिवार के एक ऐसे अध्याय का अंत कर दिया है जिसने हमेशा सत्ता के करीब रहकर भी अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखी。
प्रतीक की शादी की तस्वीरें…








