लखनऊ (राजधानी न्यूज): समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अखिलेश यादव द्वारा संसद में बिना नाम लिए “सास-बहू वाली तो हार गईं” वाले तंज पर अब स्मृति ईरानी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने सपा सुप्रीमो को नसीहत देते हुए कहा कि वे सीरियल्स की दुनिया से बाहर निकलें और संसद की कार्यवाही पर ध्यान दें।
स्मृति का पलटवार: “विरासत में मिली राजनीति बनाम अपना दम”
स्मृति ईरानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अखिलेश यादव को जवाब देते हुए लिखा:
कामकाजी बनाम बेरोजगार: स्मृति ने तंज कसा कि एक कामकाजी महिला पर वे लोग टिप्पणी कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी कोई नौकरी नहीं की।
विरासत की राजनीति: उन्होंने कहा कि जिनको राजनीति ‘धरोहर’ (विरासत) में मिली है, वे उन लोगों को याद कर रहे हैं जिन्होंने अपने दम पर मुकाम हासिल किया है।
नसीहत: उन्होंने अखिलेश से कहा कि सीरियल की बातें छोड़कर संसद में महिलाओं के संबल हेतु अहम बिल पास कराने में सहयोग करें।
सुना है आज अखिलेश जी ने संसद में मुझे याद किया। अच्छा है, जिनको राजनीति धरोहर में मिली, वे उनको भी याद करते हैं जो अपने दम पर आसमान में सुराख़ करते हैं।
कामकाजी औरत पर वे टिप्पणी करते हैं जिन्होंने ज़िंदगी में कभी कोई नौकरी नहीं की।
सीरियल से हटाकर संसद पर ध्यान लगाएं,
महिलाओं…
— Smriti Z Irani (@smritiirani) April 16, 2026
अखिलेश के भाजपा से तीखे सवाल: “नारी सिर्फ एक नारा है”
इससे पहले अखिलेश यादव ने संसद में भाजपा के महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल उठाते हुए कई आंकड़े पेश किए थे:
महिला मुख्यमंत्री: अखिलेश ने पूछा कि भाजपा शासित जिन 21 राज्यों में सरकारें हैं, वहां कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं?
संगठन में जगह: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ‘नारी’ शब्द का इस्तेमाल केवल नारे के रूप में करती है, जबकि उनके अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त जगह नहीं दी गई है।
कम प्रतिनिधित्व: सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि पूरे देश में भाजपा के कुल विधायकों में महिलाओं की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम है, जो उनके दोहरे चरित्र को दर्शाता है।
अखिलेश यादव ने जेंडर इक्वलिटी (Gender Equality) के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि सत्ता में कई वर्षों तक रहने के बावजूद महिलाओं की स्थिति में कोई संतोषजनक सुधार नहीं हुआ है।



