वॉशिंगटन/तेहरान (लाइव): मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष अब महासागरों की सीमाओं को लांघकर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह ईरान ने हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के रणनीतिक सैन्य बेस ‘डिएगो गार्सिया’ पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले की पुष्टि की है। हालांकि, ईरान के तट से लगभग 3810 किलोमीटर दूर स्थित इस बेस को मिसाइलें निशाना नहीं बना सकीं और लक्ष्य से चूक गईं।
डिएगो गार्सिया अमेरिका का वह अभेद्य किला माना जाता है, जहां से वह अपने विशालकाय बॉम्बर विमानों और निगरानी विमानों (जैसे KC-135) को ऑपरेट करता है। इतनी लंबी दूरी तक मिसाइल दागकर ईरान ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उसकी पहुंच अब खाड़ी देशों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह हिंद महासागर में स्थित अमेरिकी ठिकानों को भी दहलाने की कुव्वत रखता है। इस हमले के बाद वैश्विक सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
‘नाटो देश कायर हैं’— सहयोगी देशों पर बरसे डोनाल्ड ट्रंप; होर्मुज की सुरक्षा पर छिड़ा नया विवाद
ईरान के इस दुस्साहस के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा अपने ही सहयोगियों पर फूट पड़ा है। ट्रंप ने ईरान युद्ध में साथ न देने और सैन्य मदद से पीछे हटने वाले NATO (नाटो) देशों को खुलेआम ‘कायर’ और ‘कागजी शेर’ करार दिया है। ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका के बिना यह गठबंधन कुछ भी नहीं है।
ट्रंप ने विशेष रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) का जिक्र करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खुला रखना अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अनिवार्य है, लेकिन सहयोगी देश इस कम जोखिम वाले सैन्य कदम में भी हाथ पीछे खींच रहे हैं। उन्होंने दो-टूक लहजे में चेतावनी दी: “सहयोगी देश मदद नहीं करना चाहते, वे कायर हैं और अमेरिका उनकी इस बेरुखी को हमेशा याद रखेगा।” ट्रंप के इस बयान से पश्चिमी देशों के बीच दरार और गहरी होने की आशंका है, जिसका सीधा फायदा ईरान को मिल सकता है।
मुख्य जानकारी (Key Points):
हमले की दूरी: ईरान से 3810 किमी दूर डिएगो गार्सिया पर हमला।
मिसाइल टाइप: 2 लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें।
नतीजा: दोनों मिसाइलें लक्ष्य से चूकीं, बेस सुरक्षित।
ट्रंप का बयान: नाटो देशों को ‘कायर’ बताया और भविष्य में परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।


