नई दिल्ली/लखनऊ (बिजनेस डेस्क): मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में ईरान और कतर के बीच शुरू हुई भीषण जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। 19 मार्च को खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर ईरान के नए हमलों के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों में 30% तक का जोरदार उछाल देखा गया है। भारत के लिए स्थिति और भी गंभीर हो गई है, क्योंकि ‘इंडियन बास्केट’ में क्रूड की कीमतें लगभग दोगुनी होकर 146 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति एक-दो हफ्ते और बनी रही, तो सरकारी तेल कंपनियों के पास दाम बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा और देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 10 से 15 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर भरोसा दिलाया है, लेकिन जमीनी हकीकत डराने वाली है।

दुनिया का सबसे बड़ा गैस हब ‘रास लफ्फान’ बंद, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में टैंकरों के पहिए थमे; 2 पॉइंट में समझें असर
ईरान के ड्रोन हमलों ने कतर के रास लफ्फान (Ras Laffan) प्लांट को भारी नुकसान पहुंचाया है, जो दुनिया की 20% एलएनजी (LNG) सप्लाई का केंद्र है। इस प्लांट के बंद होने से पूरी दुनिया में गैस की किल्लत शुरू हो गई है। भारत पर इसके असर को इन दो मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:
थाली पर महंगाई की मार: डीजल महंगा होने से माल ढुलाई (Logistics) की लागत बढ़ेगी। इसका सीधा असर फल, सब्जी और अनाज की कीमतों पर पड़ेगा। चूंकि कच्चा तेल पेंट, प्लास्टिक और फर्टिलाइजर का भी आधार है, इसलिए खेती से लेकर दवाइयों तक सब कुछ महंगा होने वाला है।
सप्लाई रूट पर कब्जा: भारत अपनी जरूरत का 50% तेल और 54% गैस ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते मंगाता है। 167 किमी लंबा यह जलमार्ग अब युद्ध क्षेत्र बन चुका है, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही ठप हो गई है।
यूरोप और ब्रिटेन में भी हाहाकार मचा हुआ है। ब्रिटेन में गैस की कीमतें 140% तक बढ़ चुकी हैं, जो जनवरी 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, ऐसे में खाड़ी की यह चिंगारी भारतीय रसोई से लेकर सड़कों तक महंगाई की आग भड़का सकती है।
मुख्य आंकड़े (Impact at a Glance):
कच्चा तेल (Indian Basket): $146 प्रति बैरल (जंग के बाद)।
पेट्रोल-डीजल की संभावित बढ़ोतरी: ₹10 से ₹15 प्रति लीटर।
गैस की कीमतों में उछाल: ग्लोबल मार्केट में 30% तक की तेजी।
खतरे की जड़: कतर के रास लफ्फान प्लांट का बंद होना और होर्मुज जलमार्ग का संकट।


