सिद्धार्थनगर (राजधानी न्यूज): सोशल मीडिया पर ‘रील’ बनाने का जुनून एक बार फिर बच्चों की जान पर भारी पड़ा। सिद्धार्थनगर की काशीराम आवास कॉलोनी में शनिवार दोपहर 3 बजे रील बनाने के लिए 60 फीट ऊंची जर्जर पानी की टंकी पर चढ़े 5 बच्चों के साथ बड़ा हादसा हो गया। इस 16 घंटे के लंबे और कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन का अंत रविवार सुबह एयरफोर्स के MI-17 हेलिकॉप्टर द्वारा दो बच्चों को सुरक्षित निकालने के साथ हुआ।

कैसे हुआ हादसा?
शनिवार दोपहर करीब 3 बजे, 5 बच्चे—बाले (12), गोलू (14), शनि (11), कल्लू (15) और पवन (16)—घर के पास स्थित एक पुरानी पानी की टंकी पर रील बनाने के उद्देश्य से चढ़े।
सीढ़ी का टूटना: ऊपर कुछ देर रुकने के बाद जब वे नीचे उतरने लगे, तो जर्जर सीढ़ी अचानक टूट गई।
हादसे का शिकार: बाले, शनि और गोलू नीचे गिर गए। बाले पर सीढ़ी का मलबा गिरने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गोलू और शनि गंभीर रूप से घायल हो गए।
ऊपर फंसे: कल्लू और पवन टंकी के ऊपर ही रॉड पकड़कर लटक गए और फिर किसी तरह सुरक्षित ऊपरी हिस्से पर चढ़ गए।
“जब देवदूत बनकर आसमान से उतरा IAF का Mi-17!”
सिद्धार्थनगर में मौत की सीढ़ियां टूटीं तो उम्मीदें भी जवाब देने लगी थीं, लेकिन जब तक भारतीय वायु सेना है, हार मुमकिन नहीं।
पूरी रात पानी की टंकी पर फंसे उन दो बच्चों के लिए ये हेलीकॉप्टर सिर्फ मशीन नहीं, ज़िंदगी की नई सुबह बनकर आया।… pic.twitter.com/ewujYptT2d— Saurabh Shukla (@msaurabhshukla) May 3, 2026
रेस्क्यू ऑपरेशन: बाधाएं और प्रशासन की चुनौती
बच्चों को नीचे उतारना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि टंकी के आसपास की जमीन दलदली हो गई थी।
हाइड्रोलिक क्रेन का फेल होना: गोरखपुर से मंगाई गई हाइड्रॉलिक क्रेन के लिफ्ट सेंसर में तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद लखनऊ से क्रेन मंगाई गई, लेकिन दूरी अधिक होने के कारण देरी हुई।
सड़क निर्माण का असफल प्रयास: प्रशासन ने टंकी तक पहुंचने के लिए 150 मीटर सड़क बनाने का काम शुरू किया, लेकिन देर रात तक केवल 120 मीटर सड़क ही बन पाई।
मौसम की मार: रात करीब 3 बजे तेज बारिश शुरू होने से रेस्क्यू काम रोकना पड़ा। अंततः स्थिति की गंभीरता देखते हुए प्रशासन ने भारतीय वायुसेना से मदद मांगी।
रविवार सुबह 5:20 बजे एयरफोर्स का MI-17 हेलिकॉप्टर घटनास्थल पर पहुंचा और कुशलतापूर्वक दोनों बच्चों (कल्लू और पवन) को सुरक्षित निकाल लिया। दोनों को इलाज के लिए गोरखपुर के एयरफोर्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पीड़ितों का विवरण
26 साल से बंद थी ‘मौत की टंकी’
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पानी की टंकी पिछले 26 वर्षों से बंद पड़ी थी। जर्जर होने के कारण इसका इस्तेमाल लंबे समय से नहीं हो रहा था। बड़ी लापरवाही यह है कि प्रशासन की ओर से इस खतरनाक ढांचे पर चढ़ने से रोकने के लिए न तो कोई घेराबंदी की गई थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था। इस घटना के बाद से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।




