रामपुर (राजधानी न्यूज): समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर की सेशन कोर्ट ने सोमवार (20 अप्रैल) को पैन कार्ड फ्रॉड से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों की अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही दोनों को मिली 7-7 साल की जेल की सजा कायम रहेगी।
क्या है दो पैन कार्ड वाला पूरा मामला?
यह कानूनी लड़ाई 2019 में शुरू हुई थी, जब भाजपा नेता और वर्तमान रामपुर विधायक आकाश सक्सेना ने कोतवाली सिविल लाइंस में गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी:
फर्जी दस्तावेज: आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने धोखाधड़ी कर अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड बनवाए।
तिथियों का हेरफेर: पहले पैन कार्ड में जन्मतिथि 01 जनवरी, 1993 और दूसरे में 30 सितंबर, 1990 दर्ज थी।
पिता की भूमिका: जांच के दौरान इस जालसाजी में आजम खान की संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें भी आरोपी बनाया गया था।

एमपी-एमएलए कोर्ट से लेकर सेशन कोर्ट तक का सफर
निचली अदालत का फैसला: 17 नवंबर, 2025 को रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की कैद और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
जेल में हैं बंद: इस फैसले के बाद से ही पिता-पुत्र जिला जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।
अपील खारिज: आजम परिवार ने इस सजा के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। लंबी बहस के बाद 6 अप्रैल को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाते हुए अपील को खारिज कर दिया गया।


अदालती कार्यवाही और दलीलें
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील नासिर सुल्तान ने सजा कम करने की दलीलें दीं, जबकि अभियोजन पक्ष (सरकार) की ओर से एडीजीसी सीमा राणा और अपर महाधिवक्ता ने फर्जीवाड़े के पुख्ता सबूत पेश किए। कोर्ट ने माना कि दस्तावेजों के साथ की गई छेड़छाड़ एक गंभीर अपराध है, लिहाजा सजा में कोई राहत नहीं दी जा सकती।
भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है। इस फैसले के बाद आजम खान के राजनीतिक भविष्य और उनकी रिहाई की उम्मीदों को एक और बड़ा झटका लगा है।



