लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चर्चित 2004 कैंट फायरिंग मामले में दो दशक बाद बड़ा कानूनी फैसला आया है। शनिवार (28 मार्च 2026) को लखनऊ की विशेष MP/MLA कोर्ट ने माफिया से नेता बने बृजेश सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। यह मामला उस समय पूरे प्रदेश में सुर्खियों में रहा था, जब गाजीपुर के दो दिग्गज बाहुबलियों— मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय— के काफिले लखनऊ के पॉश इलाके में आमने-सामने आ गए थे।
अदालत ने बृजेश सिंह के साथ ही त्रिभुवन सिंह, सुनील राय, आनंद राय और अजय सिंह उर्फ गुड्डू को भी क्लीन चिट दे दी है। जज ने माना कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत पेश करने में विफल रहा, जिसके चलते संदेह का लाभ देते हुए सभी को बरी कर दिया गया।
सदर रेलवे क्रॉसिंग पर हुआ था ‘खूनी संघर्ष’; 5 मिनट तक चली थीं गोलियां
घटना 13 जनवरी 2004 की है, जब लखनऊ के कैंट थाना क्षेत्र स्थित सदर रेलवे क्रॉसिंग पर एक भयानक मंजर देखने को मिला था।
काफिलों की टक्कर: तत्कालीन विधायक मुख्तार अंसारी अपनी पत्नी के साथ गाजीपुर से लखनऊ आ रहे थे, वहीं भाजपा विधायक कृष्णानंद राय लखनऊ से गाजीपुर लौट रहे थे।
भीषण फायरिंग: दोनों गुटों की पहचान होते ही वहां युद्ध जैसे हालात बन गए। दोनों ओर से करीब पांच मिनट तक अत्याधुनिक हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग हुई, जिससे पूरा इलाका दहल उठा था।
क्रॉस FIR: इस घटना के बाद मुख्तार अंसारी ने कृष्णानंद राय और बृजेश सिंह सहित अन्य के खिलाफ हत्या के प्रयास (धारा 307) और बलवा की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। जवाबी कार्रवाई में दूसरे पक्ष ने भी एफआईआर कराई थी।

ओडिशा से हुई थी गिरफ्तारी; 23 साल तक फरार रहा था बृजेश
वाराणसी के धौरहरा (चौबेपुर) का रहने वाला बृजेश सिंह अपराध की दुनिया का बड़ा नाम रहा है। 1984 में पिता की हत्या का बदला लेने के लिए उसने घर छोड़ा था, जिसके बाद उस पर यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली समेत कई राज्यों में 41 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए।

लंबी फरारी: लगभग 23 साल तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के बाद 24 फरवरी 2008 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे ओडिशा के भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया था।
सियासी सफर: जेल में रहते हुए ही बृजेश सिंह 2016 में वाराणसी सीट से MLC (विद्वान परिषद सदस्य) भी चुना गया था।
आज के फैसले के साथ ही बृजेश सिंह के खिलाफ चल रहे महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में से एक का अंत हो गया है, जिसने कभी उत्तर प्रदेश की सियासत और अपराध के गठजोड़ को हिलाकर रख दिया था।


