अयोध्या में राष्ट्रपति का ‘शक्ति वंदन’: राम मंदिर के शिखर पर स्थापित हुआ 150 किलो का ‘श्रीराम यंत्र’, खिल उठी रामनगरी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रामलला के दर्शन किए और आरती उतारी।

अयोध्या: चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर आज (19 मार्च 2026) अयोध्या नगरी एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर न केवल रामलला के दर्शन किए, बल्कि मंदिर के दूसरे (और अंतिम) तल पर ‘श्रीराम यंत्र’ की विधिवत स्थापना भी की। इस यंत्र की स्थापना के साथ ही राम मंदिर के निर्माण कार्य को ‘पूर्ण’ माना जा रहा है। राष्ट्रपति सुबह करीब 10:30 बजे अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचीं, जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका भव्य स्वागत किया।

राष्ट्रपति का यह दौरा आध्यात्मिक रूप से बेहद खास रहा। उन्होंने तमिलनाडु के कांचीपुरम से लाए गए विशेष ‘श्रीराम यंत्र’ का पूजन किया। 150 किलो वजन का यह यंत्र शुद्ध तांबे से बना है जिस पर सोने की परत चढ़ी हुई है। इसे वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों के आधार पर तैयार किया गया है, जिसे दिव्य ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मंदिर के दूसरे तल पर बने ‘राम दरबार’ में इस यंत्र की स्थापना के दौरान दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के 51 वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद राष्ट्रपति को मंदिर निर्माण की बारीकियों और नक्काशी से अवगत कराया।

मथुरा में संतों का सानिध्य और गोवर्धन परिक्रमा: रामलला की भक्ति के बाद अब कान्हा की नगरी में राष्ट्रपति

अयोध्या में करीब 5 घंटे बिताने के बाद राष्ट्रपति दोपहर 3 बजे मथुरा के लिए रवाना हो गईं। उनके तीन दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे का अगला पड़ाव ब्रज भूमि है। आज शाम वह वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध इस्कॉन (ISKCON) मंदिर और प्रेम मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगी। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच राष्ट्रपति का काफिला शाम को मथुरा पहुंचेगा। उनके इस दौरे को लेकर ब्रजवासियों में भारी उत्साह है और पूरे मार्ग को भगवा झंडों से सजाया गया है।

राष्ट्रपति के आगामी कार्यक्रम पर एक नज़र:

  • 20 मार्च (शुक्रवार): राष्ट्रपति सुबह विख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज से मुलाकात करेंगी और उनके सत्संग में शामिल होंगी। इसके बाद वह नीम करौली बाबा की समाधि और उड़िया बाबा आश्रम भी जाएंगी।

  • 21 मार्च (शनिवार): दौरे के अंतिम दिन राष्ट्रपति गोवर्धन पहुंचेंगी, जहां वह गिरिराज जी की सप्तकोसीय परिक्रमा पूर्ण करेंगी और दानघाटी मंदिर में पूजा करेंगी।

अयोध्या में राष्ट्रपति ने मंदिर निर्माण में जुटे करीब 2,000 ‘रामभक्त’ श्रमिकों को सम्मानित भी किया, जिसे उनके दौरे का सबसे भावुक पल माना जा रहा है। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह उनका दूसरा अयोध्या दौरा है, जो देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *