लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 पूर्व यूक्रेनी सैनिकों को गिरफ्तार किया है। इन तीनों पर म्यांमार में सक्रिय आतंकी संगठनों और उग्रवादी गुटों को ‘ड्रोन टेक्नोलॉजी’ की ट्रेनिंग देने और उन्हें आधुनिक हथियार मुहैया कराने का बेहद गंभीर आरोप है। एनआईए ने लखनऊ और दिल्ली में ताबड़तोड़ छापेमारी कर अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 7 संदिग्धों को दबोच लिया है। पकड़े गए यूक्रेनी नागरिकों की पहचान पेट्रो हुरबा (36), तारास स्लिवियाक (37) और इवान सुकमानोव्स्की (34) के रूप में हुई है।
जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, ये तीनों आरोपी पूर्व में यूक्रेन की सेना का हिस्सा रह चुके हैं और ड्रोन तकनीक के विशेषज्ञ हैं। ये पेशेवर तरीके से म्यांमार के दुर्गम इलाकों में छिपे आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने के मिशन पर थे। बताया जा रहा है कि इनका पूरा सिंडिकेट यूरोप से ड्रोन के बड़े कंसाइनमेंट म्यांमार पहुंचाने की फिराक में था। इन ड्रोनों का इस्तेमाल वहां के “Ethnic Armed Groups” (EAGs) द्वारा किया जाना था, जो आगे चलकर भारत के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को हथियार और प्रशिक्षण उपलब्ध कराते। एनआईए इसे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा और सीधा खतरा मान रही है।
यूएई से मिजोरम और फिर म्यांमार का सफर, कुआलालंपुर भागने की फिराक में धरे गए आरोपी
इन तीनों संदिग्धों की ट्रैवल हिस्ट्री ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। ये तीनों 18 दिसंबर 2025 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत आए थे। इसके बाद इन्होंने अवैध रूप से मिजोरम के रास्ते म्यांमार के चिन राज्य में प्रवेश किया। वहां उग्रवादी संगठनों के साथ लंबी बैठकें करने और ट्रेनिंग देने के बाद ये वापस भारत लौटे। लखनऊ पहुंचने के बाद इन्होंने एयरपोर्ट के पास ही एक होटल में कमरा लिया था। होटल प्रबंधन द्वारा जब इनसे पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे गए और “फॉर्म C” भरवाया गया, तो इनकी दी गई जानकारी पर संदेह हुआ।
होटल ने नियमों के मुताबिक यह डेटा संबंधित एजेंसियों और एम्बेसी के साथ साझा किया, जिसके बाद खुफिया विभागों ने अलर्ट जारी कर दिया। इमिग्रेशन विभाग और एनआईए ने इनकी मूवमेंट पर पैनी नजर रखी और जैसे ही ये तीनों लखनऊ एयरपोर्ट से कुआलालंपुर (मलेशिया) भागने की तैयारी में थे, घेराबंदी कर इन्हें उठा लिया गया। फिलहाल तीनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है ताकि इनके भारतीय मददगारों और हथियारों की तस्करी के पूरे रूट का खुलासा किया जा सके। लखनऊ जैसे शांत शहर में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की मौजूदगी ने सुरक्षा इंतजामों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।


