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Reading: North Korea में कैसे होते हैं चुनाव: Kim Jong Un को मिले 99.93% वोट, 1957 के बाद पहली बार सामने आया 0.07% का ‘रहस्यमयी’ विरोध
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North Korea में कैसे होते हैं चुनाव: Kim Jong Un को मिले 99.93% वोट, 1957 के बाद पहली बार सामने आया 0.07% का ‘रहस्यमयी’ विरोध

Desk
Last updated: March 18, 2026 11:04 AM
Desk
1 week ago
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उत्तर कोरिया में 15 मार्च को हुए 15वीं सर्वोच्च जनसभा (संसदीय) चुनावों के नतीजे तानाशाही और राजनीतिक मनोविज्ञान की एक सटीक केस स्टडी हैं। सरकारी न्यूज़ एजेंसी ‘KCNA’ के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की ‘वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया’ और उसके सहयोगियों ने सभी 687 सीटों पर 100% जीत दर्ज की है। इन 687 प्रतिनिधियों में श्रमिक, किसान, बुद्धिजीवी और सरकारी अधिकारी शामिल हैं। इस चुनाव में 99.99% मतदान हुआ, जिसे सरकार जनता की अटूट वफादारी का प्रतीक बता रही है।

​1957 के बाद पहली बार दिखा ‘विरोध’: एक सोची-समझी रणनीतिक चाल?

​इन चुनावों का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह रहा कि 99.93% मतदाताओं ने सत्ता समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया, जबकि 0.07% वोट विरोध में पड़े। 1957 के बाद यह पहली बार है जब उत्तर कोरियाई राज्य मीडिया ने आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि कुछ वोट सरकार के खिलाफ भी गए हैं। भू-राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कोई वास्तविक लोकतांत्रिक बगावत नहीं है, बल्कि किम जोंग उन प्रशासन की एक कूटनीतिक चाल है। अक्सर तानाशाही में 100% समर्थन के दावे हास्यास्पद लगते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी ‘दिखावटी चुनाव प्रक्रिया’ को थोड़ा पारदर्शी और यथार्थवादी दिखाने के लिए जानबूझकर यह 0.07% का मामूली विरोध सार्वजनिक किया गया है।

​कैसे होते हैं चुनाव: समर्थन या राजद्रोह का खौफनाक विकल्प

​उत्तर कोरिया की चुनाव प्रक्रिया दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक ढांचे से बिल्कुल अलग और पूरी तरह से खौफ पर आधारित है। यहां चुनाव का अर्थ नेता चुनना नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति अपना समर्पण साबित करना होता है:

​सिर्फ एक उम्मीदवार: हर निर्वाचन क्षेत्र (Constituency) से केवल एक ही उम्मीदवार मैदान में होता है, जिसे सरकार और पार्टी खुद चुनती है। सामने कोई विपक्षी उम्मीदवार नहीं होता।

​कोई गुप्त मतदान नहीं: मतदाताओं को एक मतपत्र दिया जाता है जिस पर उसी एक उम्मीदवार का नाम छपा होता है। समर्थन जताने के लिए वोटर को बिना कुछ लिखे या मोड़े मतपत्र को खुले आम बॉक्स में डालना होता है।

​नाम काटना यानी राजद्रोह: अगर कोई मतदाता विरोध करना चाहता है, तो उसे एक अलग बूथ में जाकर लाल पेन से उस उम्मीदवार का नाम काटना होता है। यह प्रक्रिया बिल्कुल भी गुप्त नहीं होती। वहां मौजूद खुफिया अधिकारी तुरंत उस व्यक्ति की पहचान कर लेते हैं। इसे सीधा ‘राजद्रोह’ (Treason) माना जाता है, जिसके बाद उस व्यक्ति और उसके पूरे परिवार को खौफनाक लेबर कैंप (Gulag) में भेज दिया जाता है।

​(विश्वसनीय संदर्भ स्रोत: 1. कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) इलेक्शन बुलेटिन 2026, 2. रायटर्स (Reuters) एशियन जियोपॉलिटिक्स डेस्क, 3. बीबीसी न्यूज़ (BBC News) इनसाइड नॉर्थ कोरिया, 4. एमनेस्टी इंटरनेशनल: ह्यूमन राइट्स इन डिक्टेटरशिप रिपोर्ट्स)

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