नई दिल्ली/कोलंबो। अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में एक बेहद सनसनीखेज और खतरनाक सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आई है। अमेरिकी नौसेना की एक परमाणु पनडुब्बी (Submarine) ने भारत की यात्रा से वापस लौट रहे ईरान के एक शक्तिशाली युद्धपोत (Warship) को निशाना बनाया और उसे समुद्र की गहराइयों में दफन कर दिया। इस भीषण हमले में अब तक 87 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। यह घटना श्रीलंका के समुद्री तट के करीब अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में हुई, जिसने पूरी दुनिया में युद्ध की आहट तेज कर दी है। शुरुआत में इसे एक हादसा माना जा रहा था, लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के बयान ने साफ कर दिया कि यह एक सोची-समझी सैन्य कार्रवाई थी।
भारत की यात्रा से लौट रहा था ईरानी जहाज, सबमरीन ने दागी मिसाइल
यह ईरानी युद्धपोत भारत के साथ एक आधिकारिक दौरे और द्विपक्षीय चर्चा के बाद वापस अपने देश लौट रहा था। जैसे ही यह जहाज हिंद महासागर में श्रीलंका के करीब पहुंचा, अमेरिकी नौसेना की एक सबमरीन ने इसे ट्रैक करना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि अमेरिकी पनडुब्बी ने पानी के अंदर से ही स्टील्थ मिसाइलों या टॉरपीडो का इस्तेमाल किया, जिससे ईरानी युद्धपोत को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मिसाइल लगते ही जहाज के इंजन रूम में जोरदार धमाका हुआ और वह कुछ ही मिनटों में समुद्र में समा गया।
घटना के वक्त जहाज पर भारी संख्या में क्रू मेंबर्स और सैन्य अधिकारी सवार थे। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस हमले की आधिकारिक पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सुरक्षा कारणों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के उल्लंघन के जवाब में की गई है। इस बयान के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि इस हमले के बाद हिंद महासागर में जहाजों की आवाजाही पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।
श्रीलंका की नौसेना ने चलाया बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, 32 को बचाया
जैसे ही इस हमले की खबर मिली, श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना तुरंत हरकत में आ गई। हालांकि यह हमला श्रीलंका की समुद्री सीमा के बाहर हुआ था, लेकिन मानवीय आधार पर श्रीलंका ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए राहत और बचाव कार्य शुरू किया। श्रीलंका की नौसेना ने बताया कि जब उनकी रेस्क्यू टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं, तो वहां का नजारा बेहद डरावना था। समुद्र की सतह पर दूर-दूर तक केवल तेल (Oil Slick) फैला हुआ था और जहाज का कहीं नामोनिशान नहीं था। इससे अंदाजा लगाया गया कि हमला कितना सटीक और ताकतवर था।
श्रीलंकाई सेना ने कड़ी मशक्कत के बाद अब तक 32 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है। इन सभी घायलों को तुरंत श्रीलंका के गाले शहर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। बचाव दल ने समुद्र से कई शव भी बरामद किए हैं, जिनकी पहचान की कोशिश की जा रही है। श्रीलंका की सेना ने स्पष्ट किया कि जब वे वहां पहुंचे तो आसपास कोई दूसरा जहाज या विमान मौजूद नहीं था, जिससे शुरू में भ्रम पैदा हुआ था। लेकिन बाद में अमेरिकी स्वीकारोक्ति ने सारी स्थिति साफ कर दी।
तकनीकी खराबी नहीं बल्कि अमेरिका का सीधा हमला
शुरुआती घंटों में ईरान की ओर से यह आशंका जताई जा रही थी कि जहाज में शायद कोई तकनीकी खराबी आई होगी या किसी पुराने मलबे से टकराकर वह डूब गया। लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्री के सनसनीखेज खुलासे ने दुनिया को चौंका दिया। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि उनकी सबमरीन ने ही इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। अमेरिका का दावा है कि वह इस युद्धपोत की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रख रहा था और उसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मान रहा था।
इस हमले के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह दो महाशक्तियों के बीच सीधे युद्ध की शुरुआत है? भारत से लौटते समय इस तरह का हमला होना भारत के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि यह घटना भारतीय समुद्री व्यापार मार्ग के काफी करीब हुई है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सबमरीन से किया गया यह हमला दिखाता है कि अमेरिका अब समुद्र के अंदर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर ईरान को कड़ा संदेश देना चाहता है। अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह अपने 87 सैनिकों की मौत का बदला कैसे लेता है।


