कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बिगुल बज चुका है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी पहली आक्रामक चाल चल दी है। भाजपा ने सोमवार को 144 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी कर दी है, जिसमें सबसे बड़ा दांव ‘जायंट किलर’ कहे जाने वाले सुवेंदु अधिकारी पर लगाया गया है। पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दो सबसे मजबूत किलों—नंदीग्राम और भबानीपुर से मैदान में उतारा है। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि भाजपा इस बार ममता बनर्जी को उनके अपने घर में घेरने की पूरी तैयारी कर चुकी है। बंगाल के साथ-साथ केरल के लिए भी भाजपा ने 47 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है।
सुवेंदु बनाम ममता: भबानीपुर और नंदीग्राम में फिर होगा महामुकाबला?
भाजपा की पहली लिस्ट में सबसे चर्चित नाम सुवेंदु अधिकारी का है। उन्हें न केवल उनकी वर्तमान सीट नंदीग्राम से दोबारा टिकट मिला है, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ भबानीपुर से भी उम्मीदवार बनाया गया है। सुवेंदु वही नेता हैं जिन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में ममता बनर्जी को कांटे की टक्कर में शिकस्त दी थी। नंदीग्राम में हार के बाद ममता ने भबानीपुर उपचुनाव जीतकर अपनी कुर्सी बचाई थी। अब सुवेंदु को भबानीपुर से उतारकर भाजपा ने संदेश दिया है कि वह मुख्यमंत्री को किसी भी सीट पर ‘वॉकओवर’ देने के मूड में नहीं है।
भबानीपुर सीट तृणमूल कांग्रेस (TMC) का सबसे सुरक्षित गढ़ मानी जाती है। ममता बनर्जी यहां से 2011 से 2021 तक लगातार विधायक रही हैं। सुवेंदु अधिकारी ने नामांकन की खबर के बाद चुनौती देते हुए कहा है कि इस बार लड़ाई नंदीग्राम नहीं बल्कि भबानीपुर के अंदर होगी और वे दीदी को उनके गढ़ में ही मात देंगे। राजनीतिक गलियारों में इस दोहरी चुनौती को भाजपा की ‘मास्टरस्ट्रोक’ रणनीति माना जा रहा है ताकि ममता बनर्जी को उनके अपने विधानसभा क्षेत्रों में ही उलझाकर रखा जा सके।
भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति ने होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए निम्नलिखित नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है। (1/3) pic.twitter.com/VlT3Z8Q9DJ
— BJP (@BJP4India) March 16, 2026
डायमंड हार्बर और खड़गपुर में दिग्गजों की तैनाती: भतीजे अभिषेक को घेरने की तैयारी
भाजपा ने केवल ममता बनर्जी ही नहीं, बल्कि उनके भतीजे और टीएमसी के नंबर-2 नेता अभिषेक बनर्जी को भी उनके इलाके में घेरने की योजना बनाई है। डायमंड हार्बर, जो अभिषेक बनर्जी का लोकसभा क्षेत्र है, वहां की विधानसभा सीट से भाजपा ने दीपक कुमार हालदार को टिकट दिया है। दीपक हालदार का इस क्षेत्र में अपना प्रभाव है और भाजपा को उम्मीद है कि वे अभिषेक बनर्जी के प्रभाव वाले इस इलाके में सेंध लगाने में कामयाब होंगे। वर्तमान में यहां से टीएमसी के पन्नालाल हलदर विधायक हैं।
इसके साथ ही, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और अनुभवी नेता दिलीप घोष को खड़गपुर सदर से मैदान में उतारा गया है। दिलीप घोष की सांगठनिक पकड़ और क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें फिर से बड़ी जिम्मेदारी दी है। इसके अलावा आसनसोल दक्षिण से अग्निमित्रा पॉल और राशबिहारी सीट से स्वपन दासगुप्ता जैसे बड़े चेहरों को उतारकर भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। पहली सूची में 10 महिलाओं को भी स्थान दिया गया है, जो महिला मतदाताओं को लुभाने की पार्टी की कोशिश का हिस्सा है।
केरल में भी भाजपा ने खोला मोर्चा, राजीव चंद्रशेखर ‘नेमोम’ से लड़ेंगे चुनाव
बंगाल के साथ-साथ भाजपा ने दक्षिण के राज्य केरल के लिए भी अपनी पहली सूची (47 उम्मीदवार) जारी कर दी है। यहां सबसे बड़ी खबर यह है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर को तिरुवनंतपुरम की ‘नेमोम’ सीट से टिकट दिया गया है। गौरतलब है कि चंद्रशेखर 2024 के लोकसभा चुनाव में तिरुवनंतपुरम सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर से कड़े मुकाबले में हार गए थे। नेमोम सीट को भाजपा के लिए केरल में सबसे उपजाऊ जमीन माना जाता है, क्योंकि 2016 में पार्टी ने यहीं से अपना पहला विधानसभा खाता खोला था।
केरल की लिस्ट में पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन को कझाकुट्टम से और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन को मंजेश्वरम सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। भाजपा केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उन सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां उसका वोट शेयर पिछले कुछ चुनावों में बढ़ा है। केरल में भाजपा की यह सक्रियता दिखाती है कि पार्टी अब केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहना चाहती और दक्षिण के दुर्ग को भेदने के लिए बड़े चेहरों पर दांव लगा रही है।
ममता बनर्जी का चौथा कार्यकाल या भाजपा का ‘मिशन बंगाल’?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 का चुनाव बेहद निर्णायक होने वाला है। ममता बनर्जी पिछले 14 सालों से राज्य की मुख्यमंत्री हैं और अगर वे इस बार जीतती हैं, तो वे लगातार चार बार मुख्यमंत्री बनने वाली देश की पहली महिला नेता बन जाएंगी। हालांकि, भाजपा पिछले सात-आठ सालों में बंगाल में मुख्य चुनौती बनकर उभरी है। 2021 में भाजपा ने 77 सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई थी, लेकिन इस बार उसका लक्ष्य ‘मिशन 148’ (बहुमत का आंकड़ा) पार करना है।
निर्वाचन आयोग ने बंगाल में दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में चुनाव कराने का फैसला किया है, जिसके नतीजे 4 मई को आएंगे। भाजपा की पहली लिस्ट में 144 उम्मीदवारों की घोषणा यह संकेत देती है कि पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में काफी होमवर्क किया है। अब देखना यह होगा कि टीएमसी इन चुनौतियों का जवाब कैसे देती है। क्या ममता बनर्जी फिर से सुवेंदु अधिकारी की चुनौती को स्वीकार कर नंदीग्राम और भबानीपुर में आमने-सामने की जंग लड़ेंगी, या वे अपनी रणनीति में कोई बदलाव करेंगी? बंगाल के सियासी अखाड़े में शह और मात का खेल अब पूरी तरह शुरू हो चुका है।


