उत्तर प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह साल बेहद अहम माना जा रहा है। विधानसभा में पेश किए गए इस ऐतिहासिक बजट ने न सिर्फ आकार के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया, बल्कि इसके जरिए सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए विकास की साफ रूपरेखा भी खींच दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने चुनावी माहौल से पहले जनता को कई बड़े तोहफे दिए हैं। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 9 लाख 12 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए बताया कि यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 12 प्रतिशत अधिक है।
सरकार ने साफ किया कि इस बार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी गई है। 43 हजार करोड़ रुपये की नई योजनाओं की घोषणा ने गांव-कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक उम्मीदों का माहौल बना दिया है। खास बात यह रही कि बजट का बड़ा हिस्सा सीधे आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर खर्च करने की तैयारी दिखाई गई है, ताकि प्रदेश की विकास गति और तेज हो सके।
बेटियों, युवाओं और मध्यम वर्ग के लिए बड़ी सौगातें
इस बजट में सामाजिक योजनाओं को खास तवज्जो दी गई है। सरकार ने बेटियों की शादी के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 51 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने का एलान किया है। इससे ग्रामीण इलाकों और निम्न-आय वर्ग के परिवारों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।
युवाओं के लिए रोजगार के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़ा दावा किया है। आगामी वित्तीय वर्ष में 10 लाख युवाओं को नौकरी या स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही ‘सीएम युवा उद्यमी योजना’ के तहत पांच लाख रुपये तक का कर्ज बिना ब्याज और बिना गारंटी देने की घोषणा की गई है, ताकि नए कारोबारी अपने सपनों को जमीन पर उतार सकें।
शिक्षा के क्षेत्र में मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए 400 करोड़ रुपये से स्कूटी वितरण की योजना रखी गई है। वहीं, मध्यम वर्ग को घर का सपना पूरा कराने के लिए उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद नई रेजिडेंशियल स्कीम लॉन्च करने जा रही है। आवास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा—इन तीनों मोर्चों पर सरकार ने संतुलित रणनीति अपनाने का संकेत दिया है।
स्वास्थ्य और शिक्षा में विस्तार: मेडिकल कॉलेजों से नई यूनिवर्सिटीज तक
स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर प्रदेश को बड़ी राहत मिलने वाली है। अभी उत्तर प्रदेश में 60 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, लेकिन सरकार ने 16 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की है। इससे न सिर्फ इलाज की सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी हजारों नए अवसर पैदा होंगे। ग्रामीण अंचलों में डॉक्टरों की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
उच्च शिक्षा को मजबूती देने के लिए तीन नई यूनिवर्सिटीज की शुरुआत भी बजट का अहम हिस्सा है। सरकार का कहना है कि इससे स्थानीय छात्रों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर पढ़ाई का मौका मिलेगा और पलायन की समस्या कुछ हद तक कम हो सकेगी। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक कुल बजट का करीब 12.50 से 15 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया है, जो यह दिखाता है कि सरकार मानव संसाधन के विकास को लेकर गंभीर है।
छात्रों के लिए डिजिटल सुविधाओं के तहत फ्री टैबलेट और स्मार्टफोन योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए 2374 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि पढ़ाई में तकनीक का इस्तेमाल बढ़े और ऑनलाइन शिक्षा तक सबकी पहुंच सुनिश्चित हो सके।
पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्रों को नया रूप देने की तैयारी
पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहरों के विकास के लिए भी बजट में अलग से प्रावधान किए गए हैं। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले अयोध्या और नैमिषारण्य के विकास के लिए 100-100 करोड़ रुपये रखे गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
इसके अलावा मेरठ, **मथुरा-वृंदावन और कानपुर विकास प्राधिकरणों के लिए कुल 800 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। इन शहरों में सड़क, आवास, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाओं को दुरुस्त करने पर जोर दिया जाएगा।
सरकार ने पर्यटन को आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बताते हुए कहा है कि धार्मिक स्थलों के साथ-साथ ऐतिहासिक इमारतों और प्राकृतिक आकर्षणों को भी आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले सैलानियों की संख्या बढ़ सके।
एआई, कृषि और गोवंश संरक्षण: भविष्य की जरूरतों पर नजर
तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए 225 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसे शिक्षा, प्रशासन और उद्योग से जोड़ने की योजना है, ताकि सरकारी सेवाएं तेज और पारदर्शी बन सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम प्रदेश को डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे ले जा सकता है।
कृषि को कुल बजट का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है। सिंचाई परियोजनाओं, बीज वितरण, किसान प्रशिक्षण और ग्रामीण भंडारण सुविधाओं पर खर्च बढ़ाया जाएगा। छुट्टा गोवंश के रख-रखाव के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान कर ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की कोशिश की गई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र को भी 6 से 8 प्रतिशत तक का हिस्सा दिया गया है, जिसमें अस्पतालों के आधुनिकीकरण, नई स्वास्थ्य इकाइयों और दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर रहेगा।


