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Reading: अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट का बड़ा ऐलान; 30 दिन की ‘अस्थायी छूट’ से 120 डॉलर वाला कच्चा तेल हुआ ठंडा, जानें भारत पर क्या होगा असर
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The Lucknow 360 > ईरान- इसराइल- अमेरिका युद्ध > अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट का बड़ा ऐलान; 30 दिन की ‘अस्थायी छूट’ से 120 डॉलर वाला कच्चा तेल हुआ ठंडा, जानें भारत पर क्या होगा असर
ईरान- इसराइल- अमेरिका युद्धव्यापार

अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट का बड़ा ऐलान; 30 दिन की ‘अस्थायी छूट’ से 120 डॉलर वाला कच्चा तेल हुआ ठंडा, जानें भारत पर क्या होगा असर

Desk
Last updated: March 21, 2026 4:07 PM
Desk
5 days ago
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वॉशिंगटन/नई दिल्ली (लाइव): मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को महंगाई की आग से बचाने के लिए एक बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेला है। ट्रंप प्रशासन ने ईरानी और रूसी तेल की खरीद पर लगे कड़े प्रतिबंधों में अस्थायी रूप से ढील देने की घोषणा की है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, समुद्र में मौजूद ईरानी तेल टैंकरों की खरीद के लिए 20 मार्च से 19 अप्रैल 2026 तक 30 दिनों की विशेष छूट दी गई है। इस फैसले का मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों को काबू में करना है, जो युद्ध शुरू होने के बाद 70 डॉलर से उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं।

ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट ने साफ किया कि इस कदम से ग्लोबल मार्केट में लगभग 14 करोड़ बैरल तेल तेजी से आएगा, जिससे सप्लाई पर बना दबाव कम होगा। रोचक बात यह है कि अमेरिका इसे ईरान के प्रति ‘नरमी’ नहीं बल्कि एक रणनीति मान रहा है। बेसेंट ने X पर लिखा, “हम तेहरान के खिलाफ ही ईरानी बैरल का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि कीमतें कम रखी जा सकें।” ## रूस पर भी मेहरबान हुआ अमेरिका: 11 अप्रैल तक रूसी तेल खरीदने की इजाजत; ‘होर्मुज जलमार्ग’ के संकट से निपटने की तैयारी

ट्रंप प्रशासन ने न केवल ईरान, बल्कि रूस को लेकर भी अपना रुख लचीला किया है। गुरुवार को जारी नए ‘जनरल लाइसेंस’ के तहत उन रूसी टैंकरों से तेल बेचने की अनुमति दी गई है जो 12 मार्च तक लोड हो चुके थे। यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया जैसे देशों को इस राहत से बाहर रखा गया है।

इस फैसले की सबसे बड़ी वजह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना है। 167 किमी लंबा यह जलमार्ग दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का 20% हिस्सा संभालता है, लेकिन जंग के कारण यह रूट असुरक्षित हो गया है। भारत के लिए यह खबर बड़ी राहत लेकर आई है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर होने की उम्मीद जगी है।

सवाल-जवाब में समझें ट्रंप के फैसले का पूरा गणित:

प्रश्न 1: क्या यह प्रतिबंधों का अंत है?

उत्तर: नहीं, यह केवल 30 दिनों की अस्थायी छूट है। यह केवल उन टैंकरों के लिए है जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं, ताकि ‘एनर्जी क्राइसिस’ को टाला जा सके।

प्रश्न 2: भारत को इससे क्या फायदा होगा?

उत्तर: भारत रूस और खाड़ी देशों से तेल का बड़ा खरीदार है। सप्लाई बढ़ने और कीमतें 112 डॉलर के आसपास आने से भारतीय बास्केट पर बोझ कम होगा और घरेलू बाजार में महंगाई पर लगाम लगेगी।

प्रश्न 3: प्रतिबंधों का इतिहास क्या है?

उत्तर: ईरान पर पाबंदियां 1979 के बंधक संकट से शुरू हुईं। 2015 में ओबामा ने राहत दी, लेकिन 2018 में ट्रंप ने फिर से कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। अब युद्ध के दबाव में फिर से आंशिक छूट दी गई है।

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