नई दिल्ली: 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आने वाला वित्त वर्ष ‘युवाशक्ति’ से प्रेरित है और सरकार तीन कर्तव्यों—रफ्तार, क्षमता और सबका साथ—के आधार पर आगे बढ़ेगी। उन्होंने इसे सरकार के आर्थिक रोडमैप का अगला बड़ा कदम बताया। टैक्सपेयर्स, कारोबारी वर्ग और शेयर बाजार की निगाहें इस बजट में किए गए नए ऐलानों पर टिकी रहीं, क्योंकि इन फैसलों से अगले वर्षों की आर्थिक दिशा तय होती नजर आ रही है।
बजट 2026 की बड़ी घोषणाएं, इंफ्रा से लेकर चिप निर्माण तक
बजट में पश्चिम बंगाल के डानकुनी तक नए मालगाड़ी फ्रेट कॉरिडोर का ऐलान किया गया। अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल से कहीं अधिक है। केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में दुर्लभ खनिजों के लिए विशेष ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ बनाए जाएंगे। टेक्सटाइल सेक्टर में बड़े पार्क स्थापित होंगे, जबकि 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश से ‘बायो-फार्मा शक्ति’ योजना शुरू की जाएगी। सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए ISM 2.0 लॉन्च करने और मोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए बजट बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये करने की घोषणा भी की गई।
छह प्राथमिक क्षेत्र और तीन कर्तव्य, अर्थव्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड
सरकार ने रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग, पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्जीवन, MSME को मजबूत बनाने, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और शहरों के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। बजट में बताया गया कि आत्मनिर्भरता बढ़ने से आयात पर निर्भरता घटी है और सुधारों के कारण भारत करीब 7 प्रतिशत की विकास दर बनाए हुए है। वित्त मंत्री ने पिछले 12 वर्षों की आर्थिक स्थिरता, नियंत्रित महंगाई और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद ‘विकसित भारत’ की ओर निरंतर कदम बढ़ाने का भरोसा जताया।


