लखनऊ: राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े नए नियमों के विरोध में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र पंचायत के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के पास एकत्र हुए और सरकार से नियमों को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष शिवम पांडे ने किया। हाथों में तख्तियां लेकर छात्र “यूजीसी रोल बैक करो” और “एक हैं तो सुरक्षित हैं” जैसे नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रस्तावित प्रावधान छात्रों के बीच समानता के बजाय विभाजन को बढ़ावा देंगे और विश्वविद्यालय परिसरों का माहौल प्रभावित होगा।
छात्रों का आरोप, कैंपस का माहौल बिगाड़ेंगे नियम
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए शिवम पांडे ने कहा कि नए नियम छात्रों में अविश्वास और टकराव की भावना पैदा कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि नीति बनाने से पहले जमीनी हालात और शैक्षणिक संस्थानों की वास्तविक जरूरतों को समझना जरूरी है। प्रदर्शन में शामिल डॉ. आकाश सिंह ने कहा कि किसी भी तरह का नियम समाज में दूरी बढ़ाने वाला नहीं होना चाहिए। छात्र पंचायत के नेताओं ने सवाल उठाया कि भेदभाव की स्थिति में कार्रवाई की प्रक्रिया क्या होगी और क्या सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा। उनका कहना था कि शिक्षा के केंद्र राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने चाहिए और सरकार को छात्रों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
‘छात्र हित में नहीं फैसला’, प्रदर्शनकारियों की सरकार से अपील
छात्रों ने सरकार से मांग की कि सभी वर्गों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनाई जाए। छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंपने की बात कही और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। राजधानी की सड़कों पर हुआ यह विरोध प्रदर्शन फिलहाल शांतिपूर्वक संपन्न हुआ, लेकिन शिक्षा नीति को लेकर चल रही बहस ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।


