अमेरिका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा धमाका करते हुए अपने सबसे पुराने सहयोगियों यानी नाटो (NATO) देशों को खरी-खरी सुना दी है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट साझा करते हुए कहा कि नाटो के ज्यादातर देश ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान में हिस्सा लेने से कतरा रहे हैं। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए नाटो को ‘वन-वे स्ट्रीट’ (एकतरफा रास्ता) करार दिया। ट्रम्प का तर्क है कि अमेरिका पिछले कई दशकों से इन देशों की सुरक्षा के लिए अपनी तिजोरी से अरबों-खरबों डॉलर लुटाता आ रहा है, लेकिन जब आज अमेरिका को उनकी मदद की जरूरत है, तो ये देश पीछे हट रहे हैं।
ट्रम्प ने कड़े शब्दों में कहा कि उन्हें सहयोगियों के इस दोहरे रवैये पर रत्ती भर भी हैरानी नहीं है। उन्होंने अमेरिका की ताकत का प्रदर्शन करते हुए दावा किया कि अब उन्हें किसी भी देश की सैन्य सहायता की दरकार नहीं है। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य शक्ति को इस कदर नेस्तनाबूत कर दिया है कि अब वह किसी भी चुनौती का सामना अकेले दम पर कर सकता है। राष्ट्रपति का यह बयान मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच पश्चिमी देशों की एकता में आई गहरी दरार को साफ तौर पर उजागर करता है।
जापान और ऑस्ट्रेलिया को भी दिखाया ठेंगा, ट्रम्प बोले- ‘अकेले ही ईरान को संभाल लेगा अमेरिका’
ट्रम्प का गुस्सा केवल नाटो देशों तक ही सीमित नहीं रहा, उन्होंने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अपने प्रमुख रणनीतिक साझेदारों जैसे जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी दो-टूक जवाब दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब इन देशों की मदद के बिना भी ईरान की स्थिति को नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम है। ट्रम्प ने दावा किया कि उनके पिछले हमलों ने ईरान के रक्षा तंत्र को काफी हद तक पंगु बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प का यह ‘अकेला चलो’ वाला रुख वैश्विक व्यवस्था में अमेरिका की भूमिका को पूरी तरह से बदल सकता है।
उत्तर प्रदेश और भारत जैसे देशों में इस बयान को वैश्विक अस्थिरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका अपने सहयोगियों से इसी तरह दूर होता रहा, तो मिडिल ईस्ट में जारी यह तनाव एक व्यापक वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है। ट्रम्प की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर की नजरें ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस खूनी संघर्ष के अंत पर टिकी हैं। फिलहाल, व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि ट्रम्प की प्राथमिकता ‘अमेरिका फर्स्ट’ है और वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।


