मुंबई: दिवंगत अभिनेत्री और बॉलीवुड की पहली महिला सुपरस्टार श्रीदेवी की मौत के सालों बाद भी उनकी संपत्ति को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला चेन्नई के पॉश इलाके ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) स्थित उनकी एक बेहद कीमती प्रॉपर्टी से जुड़ा है। इस संपत्ति पर अपना हक जताते हुए एक बाहरी व्यक्ति ने कानूनी दावा ठोक दिया है, जिससे कपूर परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फिल्म निर्माता बोनी कपूर और उनकी दोनों बेटियां, जान्हवी कपूर व खुशी कपूर, अब अपनी पुश्तैनी विरासत को बचाने के लिए मद्रास हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गए हैं।
पूरा विवाद तब गरमाया जब चेंगलपट्टू की एक निचली अदालत ने कपूर परिवार की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने विपक्षी पार्टी की याचिका को शुरुआती स्तर पर ही रद्द करने की मांग की थी। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने का फैसला सुनाया। निचली अदालत के इस झटके के बाद बोनी कपूर ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील दायर की है। उनका साफ कहना है कि यह मुकदमा कानूनन टिकने लायक ही नहीं है और इसे महज परेशान करने के उद्देश्य से दाखिल किया गया है। कपूर परिवार का तर्क है कि श्रीदेवी के नाम वाली इस प्रॉपर्टी के सभी वैध दस्तावेज और मालिकाना हक उनके पास सुरक्षित हैं।
चेन्नई के ईसीआर रोड वाली जमीन पर किसका हक? जान्हवी और खुशी की संपत्ति पर मंडराए कानूनी बादल
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कानूनी लड़ाई अब एक दिलचस्प मोड़ पर आ गई है। जहां एक तरफ बोनी कपूर और उनकी बेटियां इसे पूरी तरह अपना बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ याचिकाकर्ता का दावा है कि इस संपत्ति से जुड़े कुछ खास अधिकार उसके पास भी सुरक्षित हैं, जिनकी अदालती जांच होनी अनिवार्य है। चेन्नई का यह इलाका अपनी महंगी जमीनों और सेलिब्रिटी बंगलों के लिए जाना जाता है, ऐसे में इस प्रॉपर्टी की कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है। श्रीदेवी के निधन के बाद यह उनकी विरासत से जुड़ा सबसे बड़ा कानूनी संकट माना जा रहा है।
जान्हवी कपूर और खुशी कपूर के लिए यह मामला भावनात्मक रूप से भी काफी संवेदनशील है, क्योंकि यह उनकी मां की यादों से जुड़ी जगह है। मद्रास हाईकोर्ट में अब इस बात पर जिरह होगी कि क्या याचिकाकर्ता के पास दावे का कोई ठोस आधार है या फिर यह केवल पब्लिसिटी स्टंट है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर रोक नहीं लगाई, तो कपूर परिवार को लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। फिलहाल, पूरी फिल्म इंडस्ट्री की नजरें मद्रास हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि ‘चांदनी’ की यह निशानी किसके पास रहेगी।


