राजधानी लखनऊ सहित पूरे देश में रमजान-उल-मुबारक का पवित्र महीना अपने मुकम्मल पड़ाव पर पहुंच गया है। शुक्रवार, 20 मार्च को महीने का तीसवां और आखिरी रोजा पूरा होने के साथ ही अब शनिवार, 21 मार्च को अकीदत और उत्साह के साथ ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाएगा। मरकजी चांद कमेटी फरंगी महल के अध्यक्ष और शहर काजी मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि गुरुवार को चांद नजर न आने की वजह से शुक्रवार को 30वां रोजा रखा जाएगा और शनिवार को ईद मनाई जाएगी। इस घोषणा के बाद से ही पूरे शहर में ‘चांद रात’ की रौनक और खरीदारी का दौर अपने चरम पर पहुंच गया है।
ऐशबाग ईदगाह में नमाज और सामूहिक दुआ का समय
लखनऊ की ऐतिहासिक ऐशबाग ईदगाह में नमाज की मुख्य और सबसे बड़ी जमात जुटेगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली शनिवार सुबह ठीक 10 बजे ईद की नमाज अदा कराएंगे। नमाज के फौरन बाद करीब 10:15 बजे सामूहिक दुआ मांगी जाएगी। इस विशेष दुआ में देश की खुशहाली, तरक्की और दुनिया भर में अमन-चैन कायम रहने की गुहार लगाई जाएगी। मौलाना ने अपील की है कि सभी नमाजी शांति और अनुशासन के साथ नमाज अदा करें और इस मौके पर जरूरतमंदों की मदद करना न भूलें।
बाजारों में ‘चांद रात’ की धूम, अमीनाबाद से चौक तक उमड़ा सैलाब
शुक्रवार की शाम ढलते ही लखनऊ के बाजारों का नजारा देखने लायक था। अमीनाबाद, चौक, नक्खास, मौलवीगंज और हजरतगंज जैसे इलाकों में तिल रखने की भी जगह नहीं बची। लोग नए कपड़ों, जूतों, टोपियों और विशेषकर इत्र की खरीदारी करते नजर आए। ईद की खास मिठास ‘सेवई’ के बाजार में भी जबरदस्त भीड़ रही। बनारसी और किमामी सेवइयों के साथ-साथ फेनी और सूखे मेवों की दुकानों पर ग्राहकों का तांता लगा रहा। देर रात तक बाजारों में चहल-पहल जारी रही, जो लखनऊ की जीवंत संस्कृति और त्योहार के प्रति लोगों के प्रेम को दर्शाती है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और प्रशासन की मुस्तैदी
ईद की नमाज को सकुशल संपन्न कराने के लिए लखनऊ पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े घेरे तैयार किए हैं। ऐशबाग ईदगाह, टीले वाली मस्जिद और अन्य बड़ी मस्जिदों के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए निगरानी रखी जा रही है। नमाजियों की भीड़ को देखते हुए यातायात विभाग ने रूट डायवर्जन प्लान लागू किया है, ताकि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित न हो। नगर निगम ने भी ईदगाहों के आसपास सफाई और जलापूर्ति के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
भाईचारे का पैगाम और खुशियों का साझा जश्न
ईद-उल-फितर का यह त्योहार केवल रोजों की समाप्ति का उत्सव नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश भी देता है। नमाज के बाद लोग एक-दूसरे के गले मिलकर ‘ईद मुबारक’ कहेंगे और गिले-शिकवे भुलाकर नई शुरुआत करेंगे। घरों में लजीज व्यंजन और सेवइयां परोसी जाएंगी, जहाँ हिंदू-मुस्लिम भाई मिलकर लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब को और मजबूत करेंगे। इस दिन ‘फितरा’ और ‘जकात’ देने की परंपरा भी निभाई जाएगी, जिससे समाज के गरीब तबके तक भी ईद की खुशियां पहुंच सकें।


