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लखनऊ: CM का सचिव बनकर 3 लाख की ठगी, टेंडर दिलाने के नाम पर ऐंठे पैसे

Desk
Last updated: March 27, 2026 4:09 PM
Desk
1 day ago
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सत्ता की हनक और रसूख का खौफ दिखाकर एक बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। खुद को मुख्यमंत्री (CM) का सचिव बताने वाले दो जालसाजों ने एक युवक को कानपुर मेडिकल कॉलेज में सरकारी टेंडर दिलाने का झांसा देकर करीब 3 लाख रुपए ठग लिए हैं। पीड़ित द्वारा पैसे वापस मांगने पर आरोपियों ने उसे फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवाने की धमकी दी। इस गंभीर मामले की शिकायत जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर दर्ज कराई गई है, जिसके बाद शासन स्तर पर हड़कंप मच गया और अपर मुख्य सचिव ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को तत्काल जांच कर कड़ी कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए हैं।

​ठगी का जाल: 2 लाख नकद और 99,999 रुपए गूगल-पे के जरिए ऐंठे

​पुलिस को दी गई शिकायत और IGRS रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित राकेश कुमार यादव को दो आरोपियों—अशोक कुमार मिश्रा और विजेंद्र प्रताप सिंह—ने अपने विश्वास में लिया था। आरोपियों ने राकेश को बताया कि उनकी मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) और शासन के उच्च अधिकारियों तक सीधी पहुंच है। इस रसूख का हवाला देते हुए उन्होंने राकेश को कानपुर मेडिकल कॉलेज में एक बड़ा और मुनाफे वाला टेंडर आसानी से दिलवाने का पक्का भरोसा दिया।

​टेंडर हासिल करने के लालच और मुख्यमंत्री कार्यालय के नाम के प्रभाव में आकर पीड़ित राकेश ने आरोपियों को उनके मांगे गए पैसे दे दिए। पुलिस शिकायत के मुताबिक, यह रकम अलग-अलग किस्तों में दी गई। राकेश ने 2 लाख रुपए की मोटी रकम नकद (Cash) के रूप में सौंपी, जबकि 99,999 रुपए डिजिटल माध्यम (गूगल-पे) से आरोपियों के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए।

​पैसे मांगने पर दी धमकी: ‘CM ऑफिस से फोन कराकर जेल भिजवा देंगे’

​पैसे के लेन-देन के बाद कई हफ्ते बीत गए, लेकिन राकेश को कानपुर मेडिकल कॉलेज का कोई टेंडर नहीं मिला। पीड़ित के अनुसार, जब भी वह टेंडर की स्थिति के बारे में पूछता, तो आरोपी अशोक और विजेंद्र लगातार नए-नए बहाने बनाकर उसे टालते रहे। लगभग तीन महीने बीत जाने के बाद जब पीड़ित को अपने साथ हुई इस 3 लाख रुपए की धोखाधड़ी का अहसास हुआ, तो उसने अपनी पूरी रकम वापस मांगनी शुरू कर दी।

​रकम वापसी का दबाव बढ़ता देख आरोपियों ने अपना असली रंग दिखाया। उन्होंने राकेश को धमकाते हुए कहा कि अगर उसने दोबारा पैसे मांगे या पुलिस के पास जाने की कोशिश की, तो वे सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से फोन करवाकर उसे किसी संगीन जुर्म में फंसाकर जेल भिजवा देंगे।

​IGRS पर शिकायत के बाद शासन सख्त, पुलिस कमिश्नर को जांच के निर्देश

​लगातार मिल रही धमकियों और अपनी जमापूंजी डूबती देख पीड़ित राकेश कुमार यादव ने न्याय के लिए मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) का सहारा लिया। वहां उसने पूरे घटनाक्रम, गूगल-पे के ट्रांजेक्शन डिटेल्स और आरोपियों की धमकियों का पूरा ब्यौरा आधिकारिक रूप से दर्ज कराया।

​चूंकि मामला सीधे तौर पर ‘मुख्यमंत्री के सचिव’ के नाम के दुरुपयोग से जुड़ा था, इसलिए शासन स्तर पर इसे बेहद गंभीरता से लिया गया। शिकायत का तत्काल संज्ञान लेते हुए अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) को इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। पुलिस अब दोनों आरोपियों के कॉल रिकॉर्ड्स, गूगल-पे ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और उनके आपराधिक इतिहास को खंगाल रही है ताकि मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके।

​(विश्वसनीय संदर्भ: 1. IGRS उत्तर प्रदेश जनसुनवाई पोर्टल शिकायत डेटा, 2. लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट अपराध बुलेटिन)

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