लखनऊ (राजधानी न्यूज): अपनी हरियाली और बागों के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अब ‘जहरीली हवा’ की चपेट में है। स्विट्जरलैंड की संस्था आईक्यूएयर (IQAir) द्वारा जारी 2025 के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ अब दुनिया का 58वां सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। यहाँ प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित मानकों की तुलना में 10 गुना अधिक पाया गया है। शहर में पीएम 2.5 (PM 2.5) कणों का औसत 54.2 µg/m³ दर्ज किया गया है, जो फेफड़ों के लिए बेहद घातक है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस भयावह स्थिति के पीछे सड़कों पर गहरे गड्ढे, उड़ती धूल, वाहनों का धुआं और अंधाधुंध निर्माण कार्यों से निकलने वाला मलबा मुख्य कारण हैं। उत्तर प्रदेश के लिए चिंता की बात यह है कि दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के 64 शहर शामिल हैं, जिनमें से 11 अकेले यूपी के हैं। गाजियाबाद का लोनी इलाका दुनिया के सबसे प्रदूषित स्थान के रूप में उभरा है।
143 देशों का अध्ययन: बच्चों के फेफड़ों पर जीवनभर रहेगा असर
यह रिपोर्ट 143 देशों के 9,446 शहरों के डेटा पर आधारित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ता है। जीवन के शुरुआती सालों में प्रदूषित हवा के कारण फेफड़ों को पहुँचने वाला नुकसान पूरी जिंदगी पीछा नहीं छोड़ता।
वैश्विक मंचों पर बढ़ती चिंता:
ग्लोबल रिस्क: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (2025) ने पहली बार वायु प्रदूषण को ‘टॉप-टियर ग्लोबल रिस्क’ माना है।
गंभीर बीमारियाँ: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों का प्रमुख कारण बताया है।
2040 का रोडमैप: विश्व स्वास्थ्य सभा ने वर्ष 2040 तक वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों को आधा करने का लक्ष्य रखा है।
डॉक्टरों की सलाह: कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए ‘हेल्थ एडवाइजरी’ जारी की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे सुबह और शाम की सैर से बचें जब प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है। बाहर निकलते समय N95 मास्क का उपयोग करें और घर के अंदर वायु शुद्ध करने वाले पौधे लगाएं।


