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Reading: ​युद्ध का खौफ: भारत में LPG की खपत 17% घटी, पेट्रोल-डीजल की मांग में भारी उछाल; 57% रेस्टोरेंट्स में खाना हुआ महंगा
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The Lucknow 360 > दुनिया > ​युद्ध का खौफ: भारत में LPG की खपत 17% घटी, पेट्रोल-डीजल की मांग में भारी उछाल; 57% रेस्टोरेंट्स में खाना हुआ महंगा
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​युद्ध का खौफ: भारत में LPG की खपत 17% घटी, पेट्रोल-डीजल की मांग में भारी उछाल; 57% रेस्टोरेंट्स में खाना हुआ महंगा

Desk
Last updated: March 18, 2026 4:54 AM
Desk
1 week ago
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मध्य पूर्व (Middle East) में भड़की जंग अब केवल कूटनीतिक बयानों या सैन्य नक्शों तक सीमित नहीं है; इसका सीधा और खौफनाक असर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और आम आदमी की रसोई पर पड़ चुका है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से चरमरा गई है। इस भू-राजनीतिक भूचाल के कारण भारत में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के बाजार में एक अभूतपूर्व मनोवैज्ञानिक और आर्थिक उथल-पुथल देखने को मिल रही है। आंकड़ों की गवाही यह है कि मार्च के पहले सप्ताह में देशभर में LPG की खपत में 17% की भारी और चौंकाने वाली गिरावट दर्ज की गई है। इसके ठीक विपरीत, घबराहट में पेट्रोल और डीजल की खरीद में अचानक बेतहाशा वृद्धि हो गई है। बाजार में मची इस अफरा-तफरी, जमाखोरी और कमर्शियल गैस की किल्लत के कारण देश के आधे से ज्यादा रेस्टोरेंट्स ने अपने खाने के दाम बढ़ा दिए हैं। भारत सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए युद्ध स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसके तहत 12 हजार से अधिक स्थानों पर छापे मारकर हजारों अवैध सिलेंडर जब्त किए गए हैं। इस विस्तृत और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में हम इस पूरे ऊर्जा संकट के रणनीतिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक आयामों को समझेंगे।

​LPG खपत में 17% की गिरावट और तेल बाजार का मनोवैज्ञानिक खौफ: डेटा का विश्लेषण

​युद्ध के समय उपभोक्ता मनोविज्ञान (Consumer Psychology) किस तरह से काम करता है, यह इस बार के ऊर्जा आंकड़ों से स्पष्ट हो जाता है। जब बाजार में किसी आवश्यक वस्तु की कमी की अफवाह उड़ती है, तो जनता सबसे पहले उसे जमा करने (Hoarding) की कोशिश करती है, लेकिन जब कीमतें आसमान छूने लगती हैं या आपूर्ति रोक दी जाती है, तो खपत का ग्राफ अचानक नीचे गिर जाता है। पेट्रोलियम बाजार के 90% हिस्से पर नियंत्रण रखने वाली भारत की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, और HPCL) के आधिकारिक डेटा के अनुसार, मार्च 2026 के पहले सप्ताह में LPG की कुल खपत मात्र 1.147 मिलियन टन रह गई है। अगर पिछले साल इसी अवधि (1.387 मिलियन टन) से इसकी तुलना करें, तो यह सीधे तौर पर 17% की गिरावट है। वहीं, फरवरी के पहले पखवाड़े की तुलना में यह गिरावट 26.3% के खतरनाक स्तर पर पहुँच गई है।

​दिलचस्प और मनोवैज्ञानिक रूप से हैरान करने वाली बात यह है कि जहाँ एक ओर लोग गैस का इस्तेमाल कम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मोबिलिटी (यातायात) सेक्टर में पैनिक बाइंग (Panic Buying) देखी जा रही है। युद्ध के कारण तेल की सप्लाई रुकने के डर से लोगों ने पेट्रोल पंपों पर लाइनें लगा दी हैं। इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल की बिक्री 13.2% बढ़कर 1.5 मिलियन टन और डीजल की बिक्री 8.2% बढ़कर 3.384 मिलियन टन तक पहुँच गई है। यह केस स्टडी दर्शाती है कि युद्ध के दौरान आम नागरिक किस प्रकार अपनी बुनियादी जरूरतों के बीच प्राथमिकताएं तय करता है।

​(संदर्भ स्रोत: 1. पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) मार्च 2026 बुलेटिन, 2. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) मासिक बिक्री डेटा, 3. ब्लूमबर्ग एनर्जी कंज्यूमर बिहेवियर रिपोर्ट, 4. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) साउथ एशिया डिमांड एनालिसिस)

​मिडिल-ईस्ट की आग से यूपी के स्ट्रीट वेंडर तक: 57% रेस्टोरेंट्स में महंगाई का विस्फोट

​इस वैश्विक युद्ध का सबसे क्रूर और सीधा आर्थिक प्रहार छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर हुआ है। कमर्शियल LPG सिलेंडरों की किल्लत और उनकी आसमान छूती कीमतों ने पूरे फूड एंड बेवरेज (F&B) सेक्टर की अर्थव्यवस्था को बिगाड़ कर रख दिया है। लोकलसर्कल्स (LocalCircles) द्वारा किए गए एक राष्ट्रव्यापी और विस्तृत आर्थिक सर्वे के अनुसार, गैस की बढ़ती लागत के दबाव में आकर पिछले एक सप्ताह के भीतर ही भारत के 57% रेस्टोरेंट्स और 54% से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स ने अपने खाने-पीने के उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं।

​यह स्थिति उत्तर प्रदेश के छोटे और मझोले कस्बों में और भी गंभीर है। सिधौली जैसे स्थानीय बाजारों में, जहाँ स्ट्रीट फूड और छोटे भोजनालय आम जनता की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा हैं, वहां कमर्शियल गैस का संकट सीधा आजीविका पर प्रहार कर रहा है। एक ठेला लगाने वाले वेंडर से लेकर बड़े रेस्टोरेंट संचालक तक, हर कोई गैस की इस किल्लत के कारण अपने मुनाफे (Profit Margin) को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। जब उत्पादन लागत बढ़ती है, तो उसका अंतिम बोझ हमेशा ग्राहक (End Consumer) की जेब पर ही डाला जाता है। यह खाद्य महंगाई (Food Inflation) का एक ऐसा चक्र है जो सीधे तौर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनावों से संचालित हो रहा है।

​(संदर्भ स्रोत: 1. लोकलसर्कल्स (LocalCircles) F&B इन्फ्लेशन सर्वे रिपोर्ट 2026, 2. नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) इम्पैक्ट असेसमेंट, 3. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) रिटेल इन्फ्लेशन इंडेक्स, 4. द इकोनॉमिक टाइम्स: इम्पैक्ट ऑफ एनर्जी क्राइसिस ऑन MSMEs)

​सरकार का ‘क्रैकडाउन’ और ब्लैक मार्केट का अर्थशास्त्र: 12000 छापे और 15000 सिलेंडर जब्त

​जब भी सिस्टम में कोई कमी (Scarcity) आती है, तो कालाबाजारी (Black Marketing) का समानांतर अर्थशास्त्र तुरंत सक्रिय हो जाता है। इस बार भी LPG संकट की आड़ में जमाखोरों और मुनाफाखोरों ने कृत्रिम कमी (Artificial Shortage) पैदा करके कीमतें बढ़ाने की साजिश रची। हालांकि, केंद्र सरकार और खुफिया एजेंसियों ने इस बार त्वरित और आक्रामक रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट रूप से बयान जारी किया है कि देश में घरेलू LPG की कोई वास्तविक कमी नहीं है और सप्लाई चैन को सामान्य रखने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।

​जमाखोरी के इस सिंडिकेट को तोड़ने के लिए राज्य सरकारों और पुलिस के आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने पूरे देश में एक अभूतपूर्व ‘क्रैकडाउन’ शुरू किया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। देश भर के गोदामों, अवैध रिफिलिंग सेंटर्स और संदिग्ध एजेंसियों पर 12,000 से अधिक ताबड़तोड़ छापे मारे गए हैं। इस कठोर प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान 15,000 से अधिक अवैध रूप से जमा किए गए कमर्शियल और घरेलू सिलेंडर जब्त किए गए हैं। सरकार की यह दंडात्मक और निवारक (Preventive) कार्रवाई आम जनता के भीतर मनोवैज्ञानिक सुरक्षा की भावना पैदा करने और बाजार से डर को खत्म करने के लिए बेहद जरूरी है।

​(संदर्भ स्रोत: 1. उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय प्रेस विज्ञप्ति, 2. आर्थिक अपराध शाखा (EOW) राज्यों की संयुक्त रिपोर्ट, 3. नीति आयोग: कमोडिटी सप्लाई चैन असेसमेंट, 4. द हिंदू: गवर्नमेंट क्रैकडाउन ऑन होर्डिंग केस स्टडी)

​’ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और होर्मुज का चोकपॉइंट: भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रहार

​इस पूरे संकट की जड़ें भारत से हजारों किलोमीटर दूर मिडिल-ईस्ट की भू-राजनीति में गहराई तक धंसी हुई हैं। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से ईरान के खिलाफ एक विनाशकारी संयुक्त सैन्य अभियान चलाया। इस ऑपरेशन के तहत ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों, गुप्त बैलिस्टिक मिसाइल साइटों, और परमाणु सुविधाओं पर सैकड़ों अचूक हवाई हमले किए गए। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई शीर्ष कमांडर मारे गए, जिससे पूरे क्षेत्र में भयंकर सत्ता और सुरक्षा का शून्य पैदा हो गया।

​बदले की आग में जलते ईरान ने अपने सबसे बड़े भू-राजनीतिक हथियार का इस्तेमाल करते हुए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को ब्लॉक कर दिया। यह नाकेबंदी भारत के लिए एक राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बन गई है। सामरिक डेटा के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक देश है, जो अपनी कुल खपत का 60% से अधिक हिस्सा विदेशों से मंगाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस आयातित LPG का 80 से 85% हिस्सा सीधे तौर पर इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर भारत पहुंचता है। इस चोकपॉइंट के बंद होने का सीधा अर्थ है—भारत की ऊर्जा धमनियों का कट जाना। यही मूल कारण है कि आज भारतीय अर्थव्यवस्था और आम नागरिक इस भयंकर गैस संकट का सामना कर रहे हैं।

​(संदर्भ स्रोत: 1. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) आर्म्स एंड कॉन्फ्लिक्ट डेटा, 2. रॉयटर्स जियोपॉलिटिकल एंड डिफेंस डेस्क, 3. ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF): इंडियाज मैरीटाइम सिक्योरिटी एंड चोकपॉइंट्स, 4. ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) सप्लाई रिस्क एनालिसिस)

नंदा देवी जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार करके मंगलवार को गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंचा।

​डिजिटल बुकिंग, PNG का विस्तार और रिफाइनरी उत्पादन: क्या भारत इस ऊर्जा चक्रव्यूह को तोड़ पाएगा?

​हर बड़ा संकट अपने साथ संरचनात्मक सुधारों (Structural Reforms) का अवसर भी लेकर आता है। इस LPG संकट से निपटने और सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। ब्लैक मार्केटिंग और लीकेज को रोकने के लिए डिजिटल सिस्टम को इतना मजबूत किया गया है कि आज एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग बढ़कर करीब 94% के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई है। इससे गैस की ट्रैकिंग आसान हुई है और वास्तविक उपभोक्ताओं तक सीधा लाभ पहुँच रहा है।

​लॉजिस्टिक दबाव को कम करने के लिए सरकार एक दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में होटलों, रेस्टोरेंट्स और अन्य कमर्शियल गैस उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने के लिए आक्रामक रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए सभी राज्यों को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) पाइपलाइन बिछाने की मंजूरी और कागजी कार्रवाई को ‘फास्ट-ट्रैक’ करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू मोर्चे पर भी बड़ी सफलता मिली है; भारतीय रिफाइनरियों की क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हुए एलपीजी के स्थानीय उत्पादन में 38% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार की यह बहुआयामी रणनीति यह दर्शाती है कि भारत अफवाहों से लड़ते हुए अपनी ऊर्जा संप्रभुता को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

​(संदर्भ स्रोत: 1. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) डिजिटल इनिशिएटिव रिपोर्ट, 2. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) और महानगर गैस (MGL) विस्तार योजनाएं, 3. वर्ल्ड बैंक: एनर्जी ट्रांजिशन एंड सिक्योरिटी इन साउथ एशिया, 4. बिजनेस स्टैंडर्ड: इंडियन रिफाइनरी आउटपुट डेटा एनालिसिस)

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