काशी: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में सोमवार की शाम उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब गंगा की लहरों के बीच एक नाव पर इफ्तार पार्टी का वीडियो सामने आया। आरोप है कि इस दौरान न केवल मजहबी आयोजन किया गया, बल्कि आस्था की प्रतीक मां गंगा के बीचो-बीच चिकन बिरयानी परोसी गई। जैसे ही यह वीडियो फेसबुक और व्हाट्सएप पर तैरने लगा, वाराणसी के हिंदूवादी संगठनों और भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। आनन-फानन में पुलिस ने मोर्चा संभाला और महज 8 घंटे के भीतर इस ‘नाव वाली इफ्तार’ में शामिल 14 लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया।
पूरा मामला अस्सी घाट से नमो घाट के बीच का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, कुछ युवकों ने एक बड़ी नाव बुक की और उस पर भारी मात्रा में खाने-पीने का सामान लेकर सवार हो गए। वीडियो में साफ दिख रहा है कि नाव पर पहले नमाज पढ़ी गई और फिर खजूर-फलों से रोजा खोला गया। विवाद तब बढ़ा जब एक दूसरे वीडियो में लोग बड़े पतीलों से निकालकर कुछ खाते दिखे। भाजयुमो के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने पुलिस को दी शिकायत में दावा किया कि नाव पर खुलेआम चिकन बिरयानी खाई गई और उसके अवशेष (हड्डियां) पवित्र गंगा जल में फेंके गए। उन्होंने इसे करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर सीधा प्रहार बताते हुए नाव चालक का लाइसेंस रद्द करने की भी मांग की है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी झाड़ा पल्ला, बोले- ‘इफ्तार कोई पिकनिक नहीं, ये जाहिलों की हरकत है’
इस विवाद ने तब नया मोड़ ले लिया जब खुद मुस्लिम समुदाय के जिम्मेदार लोगों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद, बनारस के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने बेहद सख्त लहजे में इस घटना को ‘जाहिलाना’ करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि इस्लाम में इफ्तार एक शुद्ध धार्मिक अनुष्ठान है, इसे नाव पर बैठकर पिकनिक की तरह मनाना पूरी तरह गलत है। यासीन ने सवाल उठाया कि इफ्तार के तुरंत बाद मगरिब की नमाज अनिवार्य होती है, ऐसे में नाव पर इस तरह का ढोंग करना सिर्फ मजहब को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि ऐसे ही ‘जाहिल’ लोग दूसरों को उंगली उठाने का मौका देते हैं।
वाराणसी पुलिस ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह ने बताया कि रजत जायसवाल की तहरीर पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दो विशेष टीमें गठित की गईं, जिन्होंने छापेमारी कर अब तक 14 आरोपियों को दबोच लिया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या यह महज एक गलती थी या फिर काशी की शांति भंग करने के लिए जानबूझकर किया गया कोई प्रयोग। फिलहाल घाटों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है और नाविकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपनी नावों पर किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित गतिविधि न होने दें।


