ट्रेनों में सफर के दौरान खराब खाने और अवैध वेंडर्स की मनमानी से परेशान रेल यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर है। भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सेहत को सर्वोपरि रखते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब यूपी के लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर से लेकर देश भर के किसी भी स्टेशन या ट्रेन में कैटरिंग से जुड़े स्टाफ और वेंडर्स बिना ‘QR कोड’ (QR Code) आधारित आईडी कार्ड के खाना नहीं बेच पाएंगे। रेलवे बोर्ड ने इस डिजिटल व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से अनिवार्य कर दिया है। इस पूरी कवायद का मुख्य मकसद ट्रेनों के भीतर अनधिकृत वेंडिंग (अवैध हॉकरों) पर पूरी तरह से रोक लगाना और यात्रियों को 100% सुरक्षित और भरोसेमंद कैटरिंग सेवा उपलब्ध कराना है।
QR कोड स्कैन करते ही खुलेगा वेंडर का चिट्ठा: आधार से लेकर पुलिस वेरिफिकेशन तक सब होगा पारदर्शी
अक्सर ट्रेनों में यात्री इस बात को लेकर आशंकित रहते हैं कि जो व्यक्ति उन्हें खाना या पानी की बोतल थमा रहा है, वह रेलवे का अधिकृत कर्मचारी है या कोई बाहरी अवैध हॉकर। नई व्यवस्था के तहत अब हर अधिकृत वेंडर, हेल्पर और कैटरिंग स्टाफ के गले में एक विशेष ‘QR कोड युक्त पहचान पत्र’ लटकता हुआ नजर आएगा। किसी भी वेंडर पर शक होने पर यात्री या चेकिंग स्टाफ अपने स्मार्टफोन से उस QR कोड को स्कैन कर सकेगा। स्कैन करते ही संबंधित व्यक्ति का पूरा डेटाबेस स्क्रीन पर आ जाएगा। इस डिजिटल ‘कुंडली’ में वेंडर का असली नाम, उसका आधार नंबर (Aadhaar Number), मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) जैसी बेहद संवेदनशील और जरूरी डिटेल्स शामिल होंगी। इससे अवैध रूप से ट्रेन में चढ़ने वाले वेंडर्स में खौफ पैदा होगा और यात्रियों के लिए अधिकृत व्यक्ति की पहचान करना सेकंडों का काम हो जाएगा।
रेलवे एक्ट 1989 की धारा 144 के तहत RPF का चाबुक: अवैध वेंडिंग अब है गंभीर अपराध
रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा और नियमों के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। रेलवे के सख्त नियमों के मुताबिक, चलती ट्रेनों और रेलवे परिसर (प्लेटफॉर्म) में बिना पूर्व अनुमति के कोई भी सामान बेचना एक दंडनीय अपराध है। इसे ‘Railways Act 1989 Section 144’ (रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 144) के तहत कड़ाई से लागू किया जा रहा है, जिसमें भारी जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। इस अवैध घुसपैठ को जड़ से खत्म करने के लिए रेलवे और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीमें अब ट्रेनों में लगातार नियमित जांच और विशेष धर-पकड़ अभियान चलाएंगी। नया QR कोड सिस्टम RPF जवानों के लिए भी एक बड़ा हथियार साबित होगा, जिससे वे असली और नकली वेंडर्स के बीच पलक झपकते ही फर्क कर सकेंगे और दोषियों पर ऑन-स्पॉट कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
खाने के पैकेट पर भी डिजिटल ट्रैकिंग: यात्री खुद स्कैन कर जानेंगे बेस किचन और पकने का सही समय
रेलवे का यह डिजिटल एक्शन केवल वेंडर्स की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा दायरा आपकी थाली तक पहुंच गया है। अब ट्रेनों में सर्व किए जाने वाले फूड पैकेट्स (खाने के डिब्बों) पर भी एक विशेष QR कोड चस्पा किया जाएगा। इस कोड के जरिए कोई भी यात्री अपने मोबाइल से यह स्कैन कर जान सकेगा कि उसका खाना किस ‘बेस किचन’ (Base Kitchen) में तैयार हुआ है और उसे किस समय पकाया गया था। यह ‘ट्रेसबिलिटी’ (Traceability) का सिस्टम खाने की गुणवत्ता और शुद्धता में एक क्रांतिकारी सुधार लाएगा। अगर खाना एक्सपायरी समय के बाद परोसा जा रहा है, तो यात्री तुरंत इसकी डिजिटल शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
CCTV की पैनी नजर और FSSAI सर्टिफिकेशन: ब्रांडेड कच्चा माल और सुपरवाइजर्स की तैनाती
रेलवे ने खाने की हाइजीन (स्वच्छता) को सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव किए हैं। अब ट्रेनों में केवल उन्हीं तय बेस किचन से खाना सप्लाई किया जा रहा है, जो आधुनिक और हाई-टेक सुविधाओं से लैस हैं। इन सभी किचन में 24 घंटे CCTV कैमरे लगाए गए हैं, ताकि फूड प्रिपरेशन (खाना बनाने की प्रक्रिया) की लाइव निगरानी की जा सके। कुकिंग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (मसाले, तेल, आटा आदि) के लिए सिर्फ ब्रांडेड और भरोसेमंद प्रोडक्ट्स का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।
यात्रियों की सेहत से कोई खिलवाड़ न हो, इसके लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) का सर्टिफिकेशन अब हर किचन के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। खाने की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए फूड सेफ्टी सुपरवाइजर्स की तैनाती की गई है, जो नियमित सैंपलिंग, सरप्राइज इंस्पेक्शन (औचक निरीक्षण) और ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ (Third Party Audit) जैसे सख्त कदम उठा रहे हैं। इसके अलावा, चलती ट्रेनों (ऑनबोर्ड) में IRCTC के सुपरवाइजर्स की विशेष तैनाती की जा रही है, जो पूरी कैटरिंग सर्विस पर गिद्ध सी नजर रखेंगे। कैटरिंग स्टाफ को अब केवल खाना परोसने की नहीं, बल्कि उनके व्यवहार, सर्विस स्टैंडर्ड, साफ-सफाई (हाइजीन) और कम्युनिकेशन स्किल्स (Communication Skills) को लेकर भी नियमित रूप से सख्त प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जा रही है।


