प्रयागराज (न्यायालय ब्यूरो): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार (25 मार्च 2026) को एक महत्वपूर्ण फैसले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। दोपहर बाद 3:45 बजे जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने आदेश सुनाते हुए कहा कि पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। यह मामला बटुकों के यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित है, जिसमें 21 फरवरी को झूंसी थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।
कोर्ट ने जमानत देने के साथ ही दोनों पक्षों पर कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि शंकराचार्य और शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज में से कोई भी पक्ष इस मामले को लेकर मीडिया में बयानबाजी नहीं करेगा और न ही कोई इंटरव्यू देगा। इसके अलावा, शंकराचार्य के विदेश जाने पर भी रोक लगा दी गई है; उन्हें किसी भी विदेश यात्रा के लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शर्तों का उल्लंघन हुआ, तो दूसरा पक्ष जमानत रद्दीकरण (Cancellation) की अर्जी दे सकता है।
“न्याय के प्रति आस्था बढ़ी”— शंकराचार्य; फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे आशुतोष महाराज
हाईकोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कभी-कभी कानून एक जाल जैसा लगता है जिसमें कुछ लोग दूसरों को फंसाने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसे फैसलों से न्याय प्रक्रिया के प्रति लोगों की हिम्मत और आस्था बंधती है। उन्होंने पहले ही स्पष्ट किया था कि वह सच सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट समेत किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की प्रवक्ता रीना एन. सिंह ने फैसले पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने घोषणा की कि वे इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और शंकराचार्य की गिरफ्तारी की मांग जारी रखेंगे। बता दें कि यह मामला तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका पर पोक्सो स्पेशल कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ था।
मुख्य कानूनी बिंदु (Legal Facts):
चार्जशीट (Chargesheet): पुलिस जांच पूरी होने के बाद कोर्ट में सौंपी जाने वाली वह रिपोर्ट, जिसमें आरोपी के खिलाफ सबूतों और धाराओं का विवरण होता है।
समय सीमा: यदि आरोपी जेल में हो, तो पुलिस को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी अनिवार्य है।
वकील: शंकराचार्य की ओर से पीएन मिश्रा और राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने दलीलें पेश कीं।


