उन्नाव (विशेष संवाददाता – राहुल वर्मा की रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहाँ एक ओर ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन’ का दावा कर रही है, वहीं उन्नाव जिले की कोतवाली पुलिस इन दावों की धज्जियाँ उड़ा रही है। उन्नाव कोतवाली वर्तमान में जनसेवा के बजाय ‘अवैध वसूली का अड्डा’ बन चुकी है। यहाँ तैनात सिपाहियों ने चरित्र सत्यापन (Police Verification) और जमानत के नाम पर भ्रष्टाचार का एक ऐसा “रेट कार्ड” तैयार किया है, जिसने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है।
भ्रष्टाचार का ‘सिंडिकेट’ और मुख्य किरदार
सूत्रों के अनुसार, कोतवाली में तैनात दो सिपाही—कुलदीप और सोनू—इस समानांतर भ्रष्टाचार तंत्र के मुख्य चेहरे बनकर उभरे हैं। इन सिपाहियों ने कुछ बिचौलियों के साथ मिलकर एक ऐसा गिरोह बनाया है, जो सीधे तौर पर आम नागरिकों और अधिवक्ताओं को निशाना बनाता है।
वसूली का रेट कार्ड: जानकारी के मुताबिक, किसी भी फाइल को आगे बढ़ाने के लिए ₹2500 से ₹5000 तक की मांग की जाती है।
मानसिक प्रताड़ना: जो लोग रिश्वत देने से इनकार करते हैं, उनका सत्यापन हफ्तों तक लटका दिया जाता है और उन्हें बार-बार चक्कर लगवाकर प्रताड़ित किया जाता है।
तत्काल सेवा: पैसे मिलते ही वही धूल फांक रही फाइलें कुछ ही घंटों में “क्लियर” कर दी जाती हैं।
सुरक्षा के साथ खिलवाड़: अपराधियों को क्लीन चिट का डर?
यह मामला केवल चंद रुपयों के लालच का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। सवाल यह है कि यदि पुलिसकर्मी पैसों के बदले किसी की भी फाइल पर ‘सही’ की मुहर लगा रहे हैं, तो क्या शातिर अपराधी भी इसी रास्ते से अपनी ‘क्लीन चिट’ हासिल कर रहे हैं? यदि किसी का आपराधिक इतिहास पैसों के दम पर दबाया जा रहा है, तो इसके लिए सीधे तौर पर कोतवाली के ये कर्मचारी जिम्मेदार होंगे।
कोतवाली प्रभारी के मौन पर उठते सवाल
इतने बड़े स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार के बीच कोतवाली प्रभारी चंद्रकांत मिश्रा की चुप्पी कई संदेह पैदा करती है। क्या प्रभारी को अपने मातहतों की इन करतूतों की जानकारी नहीं है, या फिर यह वसूली ऊपर तक पहुँच रही है? प्रभारी की शिथिलता यह दर्शाती है कि कोतवाली के भीतर अनुशासन पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह के लिए चुनौती
उन्नाव के पुलिस अधीक्षक (SP) जय प्रकाश सिंह, जो एक अनुशासित अधिकारी माने जाते हैं, उनके सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि वे अपने जिले की नाक के नीचे चल रहे इस खेल को कैसे रोकते हैं।
क्या सिपाही कुलदीप और सोनू जैसे भ्रष्ट कर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाएगा?
क्या कोतवाली प्रभारी की जवाबदेही तय होगी?
क्या उन पीड़ितों को न्याय मिलेगा जिन्होंने इस तंत्र के खिलाफ आवाज उठाई है?
उन्नाव की जनता अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस ‘सफेदपोश’ भ्रष्टाचार की गहन जांच और दोषियों को खाकी से बेदखल करने की मांग कर रही है।



