उन्नाव (प्रशांत त्रिपाठी): उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में सरकारी सब्सिडी वाले घरेलू गैस सिलेंडरों की ‘ब्लैक मार्केटिंग’ का एक ऐसा शातिर खेल सामने आया है, जिसने डिजिटल इंडिया के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। करोवन मोड़ स्थित ‘सतीश चंद्र गैस सर्विस’ पर आरोप है कि यहाँ उपभोक्ताओं की बिना किसी मांग या बुकिंग के ही उनके नाम की रसीदें काट दी जा रही हैं और सूत्रों का कहना है गोदाम से सिलेंडरों को सीधे ‘ब्लैक मार्केट’ (कालाबाजारी) में खपाया जा रहा है। सूत्रों की पड़ताल में इस संगठित भ्रष्टाचार के चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं।

फोन पर आ रहा सिलेंडर डिलीवरी का मैसेज: “आपका सिलेंडर डिलीवर हो गया है!”
हैरानी की बात यह है कि जिन उपभोक्ताओं ने महीनों से गैस सिलेंडर बुक ही नहीं किया, उनके मोबाइल फोन पर अचानक संदेश (Message) टपक रहे हैं कि— “आपका सिलेंडर सफलतापूर्वक डिलीवर कर दिया गया है।”
क्या है सच्चाई: उपभोक्ता घर पर खाली सिलेंडर लिए बैठा है, जबकि एजेंसी के रिकॉर्ड में उसका कोटा खत्म दिखाया जा चुका है।
कैसे हो रहा खेल: एजेंसी संचालक और कर्मचारी पर मिलीभगत कर सिस्टम में बैक-एंड से रसीद जनरेट करने का आरोप है। बिना बुकिंग के रसीद कटना इस बात का प्रमाण है कि एजेंसी के पास उपभोक्ताओं का डेटा और लॉगिन एक्सेस असुरक्षित है या काली कमाई का जुगाड़ है?
जिला पूर्ति अधिकारी ने कहा- ग़लती हो गई
जिला पूर्ति अधिकारी राज बहादुर सिंह उन्नाव ने बताया कि गलती से हो गया है,उपभोक्ता के लिए सिलेंडर की व्यवस्था करवा देंगे। पीड़ित उपभोक्ता का कहना है कि मेरी गैस बिना जानकारी के एजेंसी धारक ब्लैक में सेल कर रहे है।
ब्लैक में ‘सीलिंग’ और ऊंचे दामों पर बिक्री का आरोप
सूत्रों का दावा है कि इन ‘कागजी तौर पर डिलीवर’ हो चुके सिलेंडरों को ऊंचे दामों पर व्यावसायिक होटलों, ढाबों और अवैध रिफिलिंग करने वालों को बेचा जा रहा है। एक तरफ आम जनता अपनी बारी का इंतजार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ गैस सर्विस में ‘बिना लाइन और बिना बुकिंग’ के सिलेंडरों की ब्लैक में सीलिंग (बिक्री) की जा रही है। यह न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि सरकार को मिलने वाले राजस्व और सब्सिडी की भी खुली चोरी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दावा है कि प्रदेश में गैस की कोई कमी नहीं है। कालाबाजारी या जमाखोरी करने वालों पर कठोरतम कार्यवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश में डीजल-पेट्रोल की कोई कमी नहीं है। रसोई गैस की कमी से संबंधित अफवाहों से बचें।
यदि कोई वितरक एजेंसी अथवा निजी व्यक्ति कालाबाजारी या जमाखोरी करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
आपकी सरकार हर परिस्थिति…
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 12, 2026
प्रशासन की नाक के नीचे ‘ब्लैक मार्केटिंग’ का सिंडिकेट
यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला है। नियमतः बिना ‘कंज्यूमर रिक्वेस्ट’ के रसीद कटना असंभव है, लेकिन यहाँ खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
क्या खाद्य एवं रसद विभाग के पास इन फर्जी मैसेजों की कोई ट्रैकिंग है?
क्या जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) ने कभी सतीश चंद्र गैस सर्विस के स्टॉक और बुकिंग रजिस्टर का मिलान किया है?
उपभोक्ताओं के नाम पर कट रही इन फर्जी रसीदों का पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है?
इस घोटाले के शिकार कई उपभोक्ता अब लामबंद हो रहे हैं। ‘निपुण भारत समाचार’ के पास उन फर्जी मैसेजों और रसीदों के साक्ष्य मौजूद हैं, जो इस ‘गैस माफिया’ के काले कारनामों को उजागर करते हैं। ‘निपुण भारत समाचार’ का कहना है कि हमारी टीम बहुत जल्द इन सबूतों के साथ जिलाधिकारी और संबंधित गैस कंपनी के उच्चाधिकारियों से जवाब तलब करेगी। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार आम जनता के चूल्हे और जेब पर भारी पड़ता रहेगा।


