लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गुरुवार को एक बेहद निराला और तंज भरा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। देश में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के कार्यकर्ताओं ने अनोखा रास्ता चुना। कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस पुराने बयान को आधार बनाया, जिसमें उन्होंने नाले की गैस से चाय बनाने का जिक्र किया था। कांग्रेसियों ने बकायदा नाले में पाइप लगाया, उसे सिलेंडर से जोड़ा और फिर उसी ‘जुगाड़’ वाली गैस पर चाय बनाकर लोगों को पिलाई। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का दावा है कि प्रधानमंत्री का यह ‘साइंटिस्ट’ वाला फॉर्मूला पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ है।
कांग्रेस मुख्यालय के बाहर सजी ‘मोदी गैस’ वाली चाय की दुकान
यह पूरा घटनाक्रम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के बाहर देखने को मिला। NSUI के कार्यकर्ताओं ने सड़क किनारे एक अस्थाई चाय की दुकान लगाई। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अखिलेश यादव (NSUI सदस्य) ने बताया कि देश इस समय गैस के भीषण संकट से गुजर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जब हम गैस की कमी को लेकर चिंतित थे, तब हमें अपने ‘साइंटिस्ट’ प्रधानमंत्री का वह मशहूर भाषण याद आया, जिसमें उन्होंने गंदे नाले से निकलने वाली गैस का उपयोग करके चाय बनाने की विधि बताई थी। हमने सोचा क्यों न इसी फॉर्मूले से देश की गैस समस्या हल कर दी जाए।”
कार्यकर्ताओं ने नाले के भीतर पाइप डालकर उसे एक डमी सेटअप के जरिए चूल्हे से जोड़ा। इसके बाद वहां चाय बनाई गई और राहगीरों को दिखाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे यह दिखाना चाहते हैं कि सरकार की नीतियां जमीनी हकीकत से कितनी दूर हैं। इस दौरान वहां काफी भीड़ जमा हो गई और लोग इस अनोखे विरोध प्रदर्शन को बड़े कौतूहल से देखते रहे।
‘पूरा नाला सूख गया, पर गैस एक सिलेंडर भी नहीं भरी’
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने इस तकनीकी ‘प्रयोग’ के नतीजों पर जमकर चुटकी ली। अखिलेश यादव ने कहा, “हमने प्रधानमंत्री के फॉर्मूले को पूरी ईमानदारी से लागू करने की कोशिश की। लेकिन नतीजा यह रहा कि एक सिलेंडर भरने की कोशिश में पूरा नाला ही सूख गया। गैस की कैपेसिटी इतनी कम है कि उससे मुश्किल से कुछ कप चाय ही बन पाई। यह गैस न तो टिकाऊ है और न ही व्यवहारिक।”
कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री से मांग की कि यदि वह खुद को ‘साइंटिस्ट’ मानते हैं, तो उन्हें अब कोई नया और कारगर फॉर्मूला जारी करना चाहिए, जिससे गैस की कैपेसिटी बढ़ाई जा सके। उन्होंने कहा कि एक छोटे से सिलेंडर के लिए अगर पूरा नाला सूख रहा है, तो यह तकनीक देश के किसी काम की नहीं है। यह प्रदर्शन पूरी तरह से सरकार के उन दावों पर कटाक्ष था, जो वैज्ञानिक तथ्यों से परे माने जाते हैं।
छात्रों और मजदूरों की थाली पर महंगाई की मार
मजाक और तंज के बीच प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती महंगाई के गंभीर मुद्दे को भी उठाया। NSUI सदस्यों का कहना है कि गैस की किल्लत और ऊंची कीमतों की वजह से सबसे ज्यादा छात्र और मजदूर वर्ग परेशान है। हॉस्टल और मेस का खर्च इतना बढ़ गया है कि छात्रों को ठीक से भोजन नहीं मिल पा रहा है। जो पूड़ी पहले 20 रुपये में मिल जाती थी, वह अब 40 रुपये की हो गई है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार की गलत आर्थिक नीतियों की वजह से छोटी दुकानें और चाय की टपरियां बंद हो रही हैं। कामगारों के पास रोजगार नहीं बचा है और वे वापस गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही गैस की किल्लत दूर नहीं की गई और कीमतें कम नहीं हुईं, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा। फिलहाल, लखनऊ की सड़कों पर ‘गटर गैस की चाय’ चर्चा का विषय बनी हुई है।


