नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा कर दी है। इस बार कुल 131 हस्तियों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा, जिनमें 5 को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 को पद्मश्री प्रदान किया जाएगा। कला, खेल, राजनीति, समाजसेवा, साहित्य और शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले नाम इस सूची में शामिल हैं।
सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष पद्म पुरस्कार विजेताओं में 19 महिलाएं शामिल हैं, जबकि 6 लोग विदेशी, एनआरआई, पीआईओ या ओसीआई श्रेणी से आते हैं। खास बात यह भी है कि 16 हस्तियों को मरणोपरांत यह सम्मान दिया जा रहा है, जो उनके जीवनभर के योगदान को सम्मानित करने का प्रतीक है।
फिल्मी दुनिया से दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र को पद्म विभूषण दिए जाने की घोषणा ने खासा ध्यान खींचा है, वहीं क्रिकेट जगत से रोहित शर्मा और हरमनप्रीत कौर को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। संगीत, लोक कला और शिक्षा जैसे क्षेत्रों से जुड़े कई अनसुने नायकों को भी इस सूची में जगह मिली है, जो पद्म पुरस्कारों की व्यापकता और विविधता को दर्शाता है।
पद्म विभूषण की सूची में दिग्गज नाम, धर्मेंद्र और वीएस अच्युतानंदन को सर्वोच्च सम्मान
इस वर्ष पद्म विभूषण के लिए चुनी गई हस्तियों में देश की राजनीति, न्यायपालिका और सिनेमा जगत से जुड़े बड़े नाम शामिल हैं। दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कम्युनिस्ट नेता वीएस अच्युतानंदन जैसे दिग्गजों को इस श्रेणी में रखा गया है। यह पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक माना जाता है और इसे असाधारण व विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।
धर्मेंद्र ने दशकों तक भारतीय सिनेमा में काम करते हुए कई यादगार भूमिकाएं निभाईं और हिंदी फिल्म उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया। उनकी फिल्मों और अभिनय शैली ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है। वहीं वीएस अच्युतानंदन केरल की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे और सामाजिक न्याय, प्रशासनिक सुधार तथा जनहित के मुद्दों पर अपनी मुखर भूमिका के लिए जाने जाते थे।
पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस को न्यायपालिका में दिए गए योगदान के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। कानून व्यवस्था को मजबूत करने और कई ऐतिहासिक फैसलों में उनकी भूमिका रही है। पद्म विभूषण पाने वाली अन्य हस्तियों में भी अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
राजनीतिक विश्लेषकों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि इस साल की पद्म विभूषण सूची देश के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास के विविध पहलुओं को सामने लाती है। यह सम्मान न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धियों को मान्यता देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनता है।
पद्म भूषण और पद्मश्री में खेल और संगीत जगत की चमक, रोहित शर्मा-हरमनप्रीत बने चर्चा का केंद्र
पद्म भूषण श्रेणी में इस बार 13 हस्तियों को चुना गया है, जिनमें दिवंगत झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और प्रसिद्ध गायिका अलका याग्निक जैसे नाम शामिल हैं। शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से रहे और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष करते रहे। वहीं अलका याग्निक ने हिंदी सिनेमा में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी और संगीत जगत में एक अलग पहचान बनाई।
सबसे ज्यादा चर्चा पद्मश्री सूची को लेकर हो रही है, जिसमें 113 हस्तियों के नाम शामिल हैं। फिल्म अभिनेता आर माधवन, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, पैरा एथलीट प्रवीण कुमार और हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया को इस सम्मान के लिए चुना गया है। खेल जगत से इतने बड़े नामों का एक साथ चयन होना भारत में खेल संस्कृति के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
रोहित शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई ऐतिहासिक पारियां खेलकर देश का नाम रोशन किया है, जबकि हरमनप्रीत कौर महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। प्रवीण कुमार ने पैरा खेलों में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश को गौरवान्वित किया है और सविता पूनिया भारतीय हॉकी टीम की मजबूत स्तंभ मानी जाती हैं।
फिल्म अभिनेता आर माधवन ने न सिर्फ हिंदी बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके अभिनय की विविधता और सामाजिक विषयों पर बनी फिल्मों में भागीदारी ने उन्हें एक जिम्मेदार कलाकार के रूप में स्थापित किया है। इन सभी नामों को शामिल कर पद्मश्री सूची यह संदेश देती है कि देश प्रतिभा और मेहनत को हर क्षेत्र में समान रूप से सम्मान देता है।
लोक कलाकारों और शिक्षा क्षेत्र के नायकों को भी पहचान, गफरुद्दीन और अंके गौड़ा बने मिसाल
इस वर्ष की पद्मश्री सूची में उन लोगों को भी शामिल किया गया है, जिनके नाम बड़े मंचों पर कम सुनाई देते हैं, लेकिन जिनका योगदान भारतीय संस्कृति और समाज के लिए अमूल्य है। राजस्थान के डीग जिले के गफरुद्दीन मेवाती जोगी, जो भपंग वादक और ‘पांडुन का कड़ा’ लोकगायन परंपरा के इकलौते प्रतिनिधि माने जाते हैं, को इस सम्मान के लिए चुना गया है। वे 2500 से अधिक पारंपरिक दोहे कंठस्थ रखते हैं और देश-विदेश में इस विलुप्त होती लोककला को मंच प्रदान कर चुके हैं। इससे पहले उन्हें संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप से भी सम्मानित किया जा चुका है।
इसी तरह कर्नाटक के मैसूर के पास हरालाहल्ली गांव के रहने वाले अंके गौड़ा को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री 2026 दिया जाएगा। कभी बस कंडक्टर की नौकरी करने वाले गौड़ा ने अपनी आय का बड़ा हिस्सा किताबें जुटाने में लगा दिया। यहां तक कि उन्होंने अपनी निजी संपत्ति बेचकर दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह तैयार किया। आज उनकी ‘पुस्तक माने’ लाइब्रेरी में 20 लाख से ज्यादा किताबें मौजूद हैं, जो शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नामों को पद्म पुरस्कार सूची में शामिल करना सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें गुमनाम नायकों को भी राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाता है। यह संदेश देता है कि सिर्फ चमक-दमक वाले क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों, लोककला और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोग भी देश की असली ताकत हैं।
कुल मिलाकर पद्म पुरस्कार 2026 की सूची भारत की विविधता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्रतिभाओं के व्यापक दायरे को सामने लाती है। चाहे वह सिनेमा और खेल के बड़े सितारे हों या लोक कलाकार और पुस्तक प्रेमी, यह सम्मान उन सभी के योगदान को रेखांकित करता है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में देश का मान बढ़ाया है।


